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गर्मी की छुट्टियों के बाद यहां के जर्जर भवनों में अपना भविष्य संवारेंगे बच्चे

लंबे समय तक वीरान पड़े स्कूलों में अब चहल-पहल दिख्नने लगी है, हर बार की तरह इस बार भी नए शिक्षा सत्र में शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन सभी स्कूलों में धूमधाम से किया जा रहा है.

दो माह की गर्मी छुट्टी के बाद 24 जून को महासमुंद जिले के लगभग 1900 स्कूलों में नए शिक्षा सत्र का आगाज होने से रौनक लौट आई है. मौज-मस्ती एवं सैर सपाटे के बाद स्कूली बच्चे फिर से अपने झोले में किताबें भरकर स्कूल जाने लगे है. सामान शिक्षा प्रणाली की मांग करने वाले इस देश में कोई प्राइवेट स्कूल में एसी बस के साथ एसी भवन में पहुँच रहा है. तो कहीं ग्रामीण इलाकों में कई बच्चे वापस जर्जर भवन में चुनौतियों के बीच अपना भविष्य सवारने सरकार के स्कूल पहुँच रहे है.    

मामला है ग्राम पंचायत रूपापाली के प्राथमिक शाला का जहाँ भवन में छत पर खपरैल भी नहीं है, यह भवन बरसात में ना जाने कब भरभरा कर गिर जाए इसका भी कोई ठिकाना नहीं है. रूपापाली स्कूल एक उदाहरण है. जो शासन की नाकामी को दर्शाता है, यह बतलाता है कि सामान शिक्षा का अधिकार इस देश में बच्चों के लिए नहीं है. जबकि स्कूलों की दशा और दिशा सुधारने के लिए विभाग की ओर से अलग-अलग स्तर पर मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की गई है. बावजूद इसके कई जगह जर्जर भवन देखने से आदेश के प्रति अधिकारीयों की कर्मनिष्ठा समझी जा सकती है. कुछ शाला भवन तो इस कदर जर्जर हो गए हैं कि वहां छात्रों को अध्ययन, अध्यापन कराना उनकी जान जोखिम में डालने जैसा ही है.

ग्राम पंचायत रूपापाली में प्राथमिक शाला भवन के जर्जर हालत छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षा के प्रति सजगता को दर्शा रहा है. लेकिन ना जाने जर्जर शाला भवनों में शिक्षा के क्षेत्र में किस तरह और कब तक सुधार आएगा और शिक्षा के पिछड़ेपन से इस अंचल को उबार पायेगा.


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