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कीचड़ से सराबोर सड़क से होकर हजारों की संख्या में विद्यालय पहुँचने को मजबूर विद्यार्थी.

इस बरसात में एक बार फिर बसना विधानसभा की सड़कें कीचड़ से सराबोर होने लगी है, अंचल के लोग कई बार आवाज उठाकर इस तरह मौन हो चुके है कि मानो अब कोई उनकी सुनना नहीं चाहता, कई बड़े राजनेता आये मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिए और फ़ोटो खिंचवाए. फ़ोटो खिचवाने के बाद उसे वायरल कर जल्दी बनाये जाने आश्वाशन दिए मगर सड़क नहीं बना पाए.

आये दिन हर कोई अपने गाँव के सड़क की शिकायत तो करता ही रहता है, मगर उन्ही शिकायतों के बीच आम लोगों के अलावा देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चे भी उस शिकायत पर अमल किये जाने को लेकर इंतज़ार कर रहें होंगे. ना केवल गाँव व्यक्ति बल्कि विद्यालय पहुँचने वाला विद्यार्थी भी अब यह सोचने को मजबूर है कि सायकल दी, किताब दी, स्कूल दी मगर स्कूल को पहुँचने के लिए सड़क ही नहीं दी.  

मानसून में देरी होने की वजह से इस वर्ष शिक्षा सत्र की शुरुआत 16 जून के बजाय 24 जून को कर दी गई, शिक्षा सत्र की शुरुआत होने के साथ स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल दिखाई देना शुरू हो गई. मगर जब मानसून ने दस्तक दी तो बसना सहित आसपास के सभी गाँव में सड़कों की हालत ऐसी हो गई है कि किसी को भी उस रास्ते से अपने स्कूल जाने का मन नहीं करेगा.

बसना नगर में दो बड़े शासकीय विद्यालय के अलावा एक महाविद्यालय भी है, जहाँ के आस-पास से कई गाँव के बच्चे हर रोज अपने कीचड़ वाले रास्ते से होकर विद्यालय पहुँचते है. यह दशा उनकी इस वर्ष की नहीं है बल्कि पिछले कई सालों से हैं जहाँ कीचड़ से सराबोर होकर उन्हें विद्यालय पहुंचना होता है. वह बच्चे जो पैदल या सायकल से गाँव से निकलकर शहर पढ़ने आते है उनका जीवन और भी संघर्षपूर्ण हो जाता है.

बसना शासकीय विद्यालयों में पहुँचने के लिए विद्यार्थी अरेकेल, गनेकेरा, छान्दंपुर, सिरको, गढ़पटनी, बंसुला, दुधिपाली, खटखटी जैसे ग्राम के सड़कों का प्रयोग करते है, चौकाने वाली बात यह है कि यह सारे गाँव बसना के चारों दिशाओं में केवल 5 किलोमीटर के दायरे के अंतर्गत आता है और इस दायरे में लगभग 25 से 30 गाँव आते होंगे. इसलिए उच्च शिक्षा के लिए उन्हें बसना आना पड़ता है. इसमें सबसे ज्यादा परेशानी पैदल चलने वालों के लिए होती है जिनके के कहीं रास्ता ही नहीं बचता.

इन गाँव से प्रतिदिन हजारों की संख्या में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने बसना आते है. बसना पहुँचने के बाद भी विद्यालयों तक पहुँचाना विद्यार्थीयों के संघर्षपूर्ण रहता है, बस स्टैंड सहित कई जगहों पर पानी के भर जाने से डबरी बनने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जो कि विद्यालयों में पहुँचने के लिए बाधा है.


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