किताबें छोड़ हाथों में फावड़ा लेकर कीचड़ साफ करते बच्चों का कैस... - CG Sandesh

किताबें छोड़ हाथों में फावड़ा लेकर कीचड़ साफ करते बच्चों का कैसे बनेगा भविष्य !

यह तस्वीर है बसना ब्लाक से महज 5 किलोमीटर की दुरी पर स्थित ग्राम पंचायत पौंसरा के स्कूल की, इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जिन माता पिता ने अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ाने के लिए भेजा है वहां इनसे पढ़ाने की बजाय मजदुरी करवाया जा रहा है. सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में सभी तरह की सुविधा देने की बात कर रही हो.

लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की अक्सर ऐसी तस्वीरें देखने को मिलती है. कहीं बच्चे जर्जर भवन के साए में जी रहें है, कहीं स्कूलों तक पहुँचने के लिए कीचड़ से लथपथ होना पड़ रहा है तो कहीं स्कूल पहुँच कर भी बच्चे मज़बूरी करने को मजबूर है.

ग्राम पंचायत पौंसरा का यह प्राथमिक स्कूल नेशनल हाईवे के किनारे पर ही स्थित है. इस प्राथमिक और मिडिल स्कूल मिलाकर यहाँ कुल 6 टीचर और 2 सफाईकर्मी है. फिर भी बच्चों को पढ़ने के बजाय कीचड़ उठाने को मजबूर होना पड़ा. जिन बच्चों के हाथों में क़िताबें होनी थी उनके हाथों में फावड़ा नजर आ रहा है. जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी स्कूलों का किस तरह बंटाधार हो चूका है.  

स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि स्कूल की यह स्थिति इस वर्ष से नहीं बल्कि बीते 2 वर्षों से है. बीते 2 वर्षों से हर वर्ष इस स्कूल का परिषर कीचड़ से भर जाता है. पानी निकासी की सही व्यवस्था करने पंचायत और ग्राम के समितियों को कई बार कहा जा चूका है. मगर पंचायत भी नहीं चाहती कि उनके गाँव के बच्चे सर्वसुविधायुक्त और स्वच्छ वातावरण में पढ़े.

इन कीचड़ को हटाने और हमेशा के लिए इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए कई बार पंचायत में शिकायत की गई है लेकिन पंचायत इसका निराकरण तीन वर्षों से नहीं कर पा रहा है. शिक्षक ने बताया कि इस स्कूल में नेशनल हाईवे का पानी सीधे आता है. नेशनल हाईवे से स्कूल नीचे हो जाने के कारण पानी खेतों में ना जाकर स्कूल में चला आता है.

पानी के भर जाने से स्कूल के अंदर इतना कीचड़ हो जाता है कि बच्चे स्कूल परिषर के अंदर जाने में भी असहज महसूस करते है, कीचड़ भरा होने के कारण बच्चे ना शौचालय जा पाते है और ना ही खेल पाते है. भोजन के बाद और पानी के लिए भी कीचड़ से होकर गुजरने को मजबूर हो जाते है.

इन परेशानियों के चलते स्कूल के शिक्षकों द्वारा बच्चों से कीचड़ उठवाना पड़ा जबकि उस स्कूल में 6 शिक्षक और 2 सफाईकर्मी मौजूद थे. जहाँ बच्चे अफसर बनने के ख़्वाब को पूरा करने पहुँचते है वहां शिक्षक उन्हें पढ़ाने की बजाय मजदुरी करवाते है. ऐसी स्थिति में कैसे बनेगा उन बच्चों का भविष्य यह समझ से परे है.

जानकारी के अनुसार 3 घंटों तक इन स्कूल के बच्चों से हाथ में फावड़ा और बाल्टी लेकर कीचड़ उठवाया गया, और जब मामला मिडिया में आया तो लीपापोती करने की कोशिश की गई. हलाकि शिक्षक भी कुछ अपना श्रमदान अथवा अपनी सहायता से ट्रेक्टर या जेसीबी लगवाकर इस समस्या का समाधान कर सकते थे लेकिन उन्होंने बच्चों से कीचड़ उठवाना ही जरुरी समझा.            

बसना ब्लाक शिक्षा अधिकारी से बात करने पर उन्होंने इस बारे में कुछ भी जानकारी होने से इनकार किया, और फोटो मंगवाया कर जाँच की कार्यवाही किये जाने को कहा.


अन्य सम्बंधित खबरें