MRP से अधिक कीमत पर शराब बेचे जाने से उपभोक्ता परेशान, पुरानी शराबों को बेचा जा रहा नई कीमतों में.
छत्तीसगढ़ में शराबबन्दी की घोषणा का उड़ाया जा रहा है. शराबबंदी होने के बजाय अब अवैध रुप से शासकीय दुकानों पर ही शराब बेचा जाने लगा है. छत्तीसगढ़ में कहीं मध्यप्रदेश की शराब बेची जा रही है तो कहीं अलग से प्राइज टैग लगाकर शराब बेचने की बात सामने आ रही है.
इन सबके बाद अब एक और नया मामला देखने को मिल रहा है जहाँ शराब की कीमत से अधिक दर का बिल निकालकर शराब बेचा जा रहा है. ऐसा मामला सामने आया है बसना ब्लाक के ग्राम पंचायत गढ़फुलझर में स्थित शराब दुकान का जहाँ सिगनेचर के अध्धी में 430 रु प्रिंट MRP अंकित है पर 470 रु अवैधानिक रूप से बिक्री की जा रही है. जिसके बारे में शराब दुकान में कोई जानकारी नही दी जा रही है उपभोक्ताओं द्वारा अब इसे लूटा माना जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या अब शासन को अपने कोष के लिए इस तरह वसूली की आवश्यकता हो गई है ?
वही इस मामले में जिला आबकारी अधिकारी से पूछने पर बताया गया कि हो सकता है कि वह पुराना स्टॉक हो, जिसके बाद शराब के मूल्य में कुछ वृद्धि हुई है. हलाकि उन्होंने सिगनेचर के वर्त्तमान कीमत की जानकारी नहीं होने की बात कही. उन्होंने बताया कि हो सकता है यह शराब पिछले का हो.
इसके बाद जब छत्तीसगढ़ में उपभोक्ताओं के लिए सभी प्रकार की शराब उपलब्ध कराने वाली छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड की वेबसाइट https://excise.cg.nic.in/csmcl/PriceList को देखा गया तो पता चला कि वाकई वर्तमान में शराब की कीमतों में कुछ वृद्धि हुई है.
इस वेबसाइट में छत्तीसगढ़ में बेची जाने वाली सभी शराब के कीमतों की सूची दी गई है. जहाँ कीमत लिखकर बताया गया है कि इस मूल्य से अगर अधिक दर पर शराब बेची जाती है तो इस बात की शिकायत टोल फ्री नंबर 14405 पर की जा सकती है.
मगर उपभोक्ताओं को केवल MRP की कीमतों का पता होता है. नियम के तहत MRP से अधिक कीमत पर कोई भी सामान बेचे जाने पर जुर्माना का प्रावधान है. और दो साल तक सजा भी हो सकती है.
वही एक जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से दुकानदारों को सरकार की तरफ से एमआरपी के साथ स्टिकर लगाकर नए रेट पर सामान को बेचने की जो छूट मिली हुई थी जो 30 सितंबर 2017 तक थी. जानकरी के अनुसार शराब को अब तक जीएसटी के दायरे में नहीं रखा गया है. मगर पुराने स्टॉक को उपभोक्ताओं तक नए MRP की कीमत में बेचना उपभोक्ताओं के साथ धोखा है.
ग्रामीण द्वरा की जा रही शराब दुकान हटाने की मांग.
शासकीय शराब दुकान बसना पदमपुर मार्ग मेन रोड पर मुख्य चौक गढ़फुलझर पर स्थित है जहां मदिरा प्रेमियों का भीड़ लगा रहता है अनियमित पार्किंग से आवागमन अवरूद्ध रहता है. गढ़फुलझर एक प्रमुख व्यावसायिक एवं शैक्षणिक केंद्र होने के कारण आसपास के ग्रामों से ग्रामीण एवं छात्र-छात्राओं का आना जाना इसी मार्ग से होता है.
इसी शराब दुकान की वजह से कई गंभीर सड़क दुर्घटनाएं इसी स्थान पर हो चुकी है जिसमें कई मृत एवं घायल हुए हैं ग्राम पंचायत गढ़फुलझर द्वारा भी शराब दुकान हटाने के लिए विधिवत प्रस्ताव एवं आवेदन अनुविभागीय अधिकारी जिला सीईओ एवं कलेक्टर महोदय को दिया जा चुका है. परंतु आज दिवस तक कार्यवाही शुन्य है.
ग्रामीणों का कहना है इसमें मुख्य मार्ग पर शराब दुकान का होना बिल्कुल ठीक नहीं है इसे अन्यत्र गांव से बाहर विस्थापित किया जाना बहुत ही आवश्यक है शराबबंदी की घोषणा के साथ कांग्रेसी सरकार बनी तो ग्रामीणों को विश्वास था कि दुकान जरूर बंद हो जाएगी परंतु राजस्व बढ़ाने के लक्ष्य के कारण शराब दुकान में अनियमितता और गड़बड़ी और ज्यादा बढ़ गई है.