आवास नहीं बना फिर भी गतल लोकेशन और अधुरी फ़ोटो अपलोड कर किया राशि आहरण.
2022 तक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वादा किया है कि हर गरीब के पास पक्का मकान होगा. जिसके लिए हर जरुरत मंद को किस्तों में पैसे देकर उसका घर तैयार करवाया जा रहा है. मगर आये दिन इस योजना का लाभ जरुरतमंद की जगह सरकार को चुना लगाने वाले ले जाते है.
मामला है बसना जनपद के ग्राम पंचायत सागरपाली का जहाँ ऐसे ही चुना लगाने वाले लोगों के ख़िलाफ गाँव के ही शिकायतकर्ता चंद्रकुमार राणा ने जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से शिकायत की है. शिकायतकर्ता ने आवेदन देकर बताया है कि सागरपाली का महेंद्र महापात्र सत्र 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास के नाम पर बिना आवास बनाए सभी रकम को निकाल लिया.शिकायतकर्ता ने बताया कि जिसने प्रधानमंत्री आवास के नाम पर फर्जी आहरण किया है उसका अब तक खुद का पक्का मकान नहीं है. फिर भी महेंद्र महापात्र के नाम पर सत्र 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास के नाम पर सभी किस्तों को स्वीकृत कराकर राशि का आहरण कर लिया गया है. शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया है कि सागरपाली के समीपस्थ ग्राम सूखापाली के गाँव में एक आदमी लोन लेकर घर बना रहा था. जिसके मकान का फोटो उपयोग में लाकर जिओ टेकिंग कर सभी किस्तो का आहरण कर लिया गया है.
गलत डाटा डालकर किया गया आहरण ? अधिकारी भी शामिल ?
प्रधानमंत्री आवास योजना जरुरत मंदों तक पहुंचे और भ्रष्टाचार से मुक्त रहे इसलिए प्रधानमंत्री आवास में बनाये जाने वाले मकान का आंकड़ा डिजिटल रखा गया है. इसमें पारदर्शिता इतनी रखी गयी है कि घर बैठे कोई भी व्यक्ति किसी के भी आवास से सम्बंधित पूरी जानकारी हासिल कर सकता है. भ्रष्टाचार को 100 फीसदी दुर रखने के लिए इसमें जियो टैगिंग की प्रक्रिया भी अपनाई गई है. मगर सागरपाली के मामले में गलत डाटा डाला गया है या जियो टैगिंग की प्रक्रिया को हैक कर लिया गया है यह तो जाँच ही बताएगा.जियो टैगिंग की प्रक्रिया के तहत स्थल का निरीक्षण कर मोबाइल में एप्प के माध्यम से फ़ोटो और लोकेशन की जानकारी अपलोड करनी होती है. जिसके बाद प्रक्रिया पूरी होने के बाद हितग्राही को पैसे मिलते है. मगर सागरपाली का जो मामला है उसमे गूगल मैप में लोकेशन की जानकारी गलत होने के साथ अधूरे आवास की फ़ोटो अपलोड करके उसे पूर्ण बता दिया गया है. इसमें अधिकारी द्वारा चार बार स्थल का निरीक्षण किया है. और चारों बार ही ग्राम पंचायत सागरपाली के आसपास का लोकेशन भी नहीं डाल पाया गया है.