श्री अन्न आहार मात्र नहीं, भारतीयों की जीवन पद्धति है: प्रो (डॉ) अनुसुइया अग्रवाल
अन्न के साथ श्री का जुड़ा होना समृद्धि का द्योतक है: डॉ अनुसुइया
उक्त उद्गार शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजिम में श्री अन्न फूड फेस्टिवल कार्यशाला में प्रो डॉ अनुसुइया अग्रवाल डी लिट् प्राचार्य स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय महासमुंद मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त कर रही थी। यह आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सविता मिश्रा के मार्गदर्शन एवं रुसा 2.0 द्वारा प्रायोजित किया गया था।
डॉ अनुसुइया ने अपनी बात स्थापित करते हुए कहा कि श्री अन्न चिर पुरातन और चिर नवीन है। यद्यपि हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की पहल पर संयुक्त राज्य द्वारा वर्ष 2023 को मिलेट्स ईयर घोषित किया गया था तथापि श्री अन्न की अवधारणा और परिकल्पना सृष्टि के निर्माण काल से रहा है। लोक साहित्य के पन्नों को यदि पलटे तो यह ज्ञात होता है कि उस समय प्रचलित लोकोक्तियों और मुहावरों में भी कोदो, कुटकी, सावा का उल्लेख है। मिलेट्स जिसे श्री अन्न कहा जाता है; वह स्वास्थ, पोषण और डाइजेशन की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है। प्रतिकूल जलवायु और पथरीली जगह पर भी यह उत्पन्न किया जा सकता है। डॉ. अग्रवाल ने जयशंकर प्रसाद के सुप्रसिद्ध महाकाव्य कामायनी का उदाहरण देकर मानव जीवन के महत्व व उसे श्री अन्न का उपयोग करके संरक्षित करना चाहिए़ उस पर विस्तृत रूप से बताया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अभया आर. जोगलेकर प्राचार्य ,शासकीय बी. पी. लोधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, आरंग, वक्ता के रूप में डॉ. धर्मेंद्र खोखर सीनियर साइंटिस्ट इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर एवं विशिष्ट अतिथि महाविद्यालय के जनभागीदारी समिति की अध्यक्ष सुश्री छाया राही रहे। प्रारंभ में कार्यशाला के संयोजक डॉ. भानु प्रताप नायक (सहा. प्राध्यापक, गृह विज्ञान) ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. अभया आर. जोगलेकर ने अपने संबोधन में कार्यक्रम की भूमिका और उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कछुआ और खरगोश की प्रसिद्ध कहानी का उदाहरण दिया और बताया कि भारतीय परंपरा में भी धैर्य, संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते जंक फूड के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि इसके अत्यधिक सेवन से शुगर, डायबिटीज और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। उन्होंने बताया कि इन समस्याओं से बचाव के लिए पारंपरिक भारतीय आहार पद्धति को अपनाना आवश्यक है, जिसमें मिलेट्स का महत्वपूर्ण स्थान है।उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि देश के कई प्रमुख मंदिरों में भी मिलेट्स का उपयोग किया जाता है। जगन्नाथ मंदिर में मिक्स मिलेट का भोग लगाया जाता है, वहीं दक्षिण भारत के मुरुगन मंदिर में भगर और सावा से बने प्रसाद का वितरण किया जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति में प्राचीन समय से ही मिलेट्स को विशेष महत्व दिया जाता रहा है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्था प्रमुख डॉ. सविता मिश्रा ने मिलेट्स (श्री अन्न) को भारतीय परंपरा और स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नायक को बधाई देते हुए कहा इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अत्यंत उपयोगी बताया और सभी को अपने दैनिक आहार में मिलेट्स को शामिल करने का संदेश दिया।
उद्बोधन की अगली कड़ी में डॉ. धर्मेंद्र खोखर ने श्री अन्न के उत्पादन पर विस्तृत रूप से चर्चा की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सुश्री छाया राही ने महाविद्यालय परिवार को कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की अगली कड़ी में श्री अन्न फूड फेस्टीवल के अंतर्गत श्री अन्न आनंद मेला का आयोजन किया गया तत्पश्चात विभिन्न प्रतियोगिताओं में स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण किया गया एवं अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेश कुमार बघेल (सहा. प्राध्यापक, समाजशास्त्र) एवं आभार प्रदर्शन श्रीमती श्वेता खरे(सहा. प्राध्यापक, अंग्रेजी) ने किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय महासमुंद के श्री तरुण बांधे सहा प्राध्यापक वाणिज्य एवं श्री आलोक हिरवानी अतिथि व्याख्याता कंप्यूटर एप्लीकेशन सहित डॉ. के. आर. मतावले, श्री एम. एल. वर्मा, सुश्री चित्रा खोटे, श्रीमती क्षमा शिल्पा चौहान, कु.मनीषा भोई, श्री मुकेश कुर्रे, डॉ. देवेंद्र देवांगन, श्री तामेश्वर मार्कंडेय आदि सहायक प्राध्यापकगण , लोकेश जागडे ग्रंथपाल, राजकुमार साहू, पिटू धृतलहरे (प्रयोगशाला तकनीशियन) ख़ोमन साहू,डॉ. ग्रीष्मा सिंह, तृप्ति साहू, नेहा सोनी,निधि बग्गा, हनी पाटकर, डॉ. सर्वेश कौशिक पटेल, वाणी चंद्राकर, हेमचंद साहू,मनीष साहू, डाहरू सोनकर, डॉ. अश्विनी साहू, तोपचंद बंजारे, प्रदीप टंडन आदि अतिथि व्याख्याता, सोनम चंद्राकर,सुमन साहू, शुभम शर्मा, मनीष साहू, गरिमा साहू, टेमन साहू आदि स्ववितीय शिक्षक के साथ-साथ महाविद्यालय की छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।