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महासमुंद : किशनपुर में झींगा पालन से मां दुर्गा समिति को मिल रही साढ़े तीन लाख रुपए की वार्षिक आय

जय माँ दुर्गा मत्स्य सहकारी समिति मर्यादित, किशनपुर को मत्स्य पालन विभाग द्वारा प्रदान किए गए तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं के तहत मिली सहायता ने उनके कार्य को नई दिशा दी है। इस सहायता से आज समिति द्वारा तीन गुणा अधिक आय अर्जित किया जा रहा हैं। इस समिति में कुल 24 सदस्य हैं, जिनमें 11 महिलाएं और 13 पुरुष शामिल हैं। विगत 20 वर्षों से यह समिति मत्स्य पालन के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है तथा इसके पास 31.59 हेक्टेयर जलाशय और 3.50 हेक्टेयर तालाब का जलक्षेत्र उपलब्ध है, जिसका सुनियोजित उपयोग कर समिति ने प्रगति हासिल की है।

समिति सदस्य बताते है कि उनका जीवन पहले काफी संघर्षपूर्ण था, जहां उनकी आजीविका मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर निर्भर थी। सीमित संसाधनों के कारण उनकी वार्षिक आय लगभग 36 हजार रुपये ही थी, जिससे परिवारों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था। लेकिन समय के साथ मत्स्य पालन विभाग के मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और योजनाओं से जुड़कर समिति ने मत्स्य पालन को अपनाया और धीरे-धीरे अपनी स्थिति में सुधार लाना शुरू किया।

मत्स्य पालन विभाग द्वारा प्रदान किए गए तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं उनके कार्य को नई दिशा दी। जाल, आइस बॉक्स, मत्स्य बीज, सीफेक्स, झींगा बीज तथा मोटरसाइकिल अनुदान जैसी सुविधाओं ने उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में भूमिका निभाई। विभागीय अधिकारियों के निरंतर प्रोत्साहन और सफल मत्स्य पालकों से मिली प्रेरणा ने समिति के सदस्यों का मनोबल मजबूत किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

समिति ने पारंपरिक पद्धतियों को छोड़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाया, जिसमें मिश्रित मत्स्य पालन, उन्नत बीजों का उपयोग, परिपूरक आहार और वैज्ञानिक तरीके शामिल हैं। इन नवाचारों के परिणामस्वरूप उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जहां पहले लगभग 7 क्विंटल उत्पादन होता था, वहीं अब यह बढ़कर 21 क्विंटल तक पहुंच गया है। इसके साथ ही झींगा पालन को अपनाने से अतिरिक्त आय के नए स्रोत भी विकसित हुए, जिससे कुल आय में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई और वार्षिक आय लगभग 3 लाख 40 हजार रुपये तक पहुंच गई।

मत्स्य पालन से जुड़े रहने के कारण समिति के सदस्यों के जीवन स्तर में अधिक बदलाव आया है। पहले जहां आर्थिक तंगी के कारण दैनिक जीवन प्रभावित होता था, वहीं अब परिवारों की स्थिति सुदृढ़ हुई है। कच्चे मकानों को पक्के मकानों में परिवर्तित किया गया, सदस्यों ने मोटरसाइकिल जैसी सुविधाएं प्राप्त कीं और नियमित बचत की दिशा में कदम बढ़ाते हुए समिति के नाम से बैंक खाते में राशि जमा करना शुरू किया गया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी समिति को मजबूती प्रदान की है, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है।


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