महासमुंद : प्रकृति के साथ विकास का फायदा
अब कारोबार सिर्फ मुनाफे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण और प्रकृति को साथ लेकर चलना भी उतना ही जरूरी हो गया है। इसी दिशा में वेदांता एल्युमीनियम ने एक अहम् कदम उठाया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी अब अपने बिजनेस के साथ प्रकृति को भी बराबर महत्व दे रही है।
कंपनी को 2025 में आने वाली अपनी पहली टास्क फोर्स ऑन नेचर-रिलेटेड फाइनेंशियल डिस्क्लोजर रिपोर्ट के लिए 'अर्ली अडॉप्टर' के तौर पर पहचान मिली है। साथ ही, 2050 तक 'नो नेट लॉस' का लक्ष्य दोहराते हुए वेदांता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में उसके फैसलों में प्रकृति भी एक अहम् हिस्सा होगी।
इस पहल के जरिए कंपनी अपने कामकाज में प्रकृति से जुड़े जोखिम, संसाधनों का इस्तेमाल और जैव-विविधता पर असर जैसी चीजों को समझकर फैसले ले रही है। इस पर कंपनी के सीईओ राजीव कुमार ने कहा, "हमारा फोकस सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ विकास पर है, जिससे लंबे समय तक सभी को फायदा मिले।"
जमीनी स्तर पर भी इसके बेहतर नतीजे दिख रहे हैं। कंपनी अब तक 29 लाख से ज्यादा पेड़ लगा चुकी है और 2030 तक 70 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य है। साथ ही, बांस के बागान, औषधीय पौधे और कृत्रिम घोंसलों जैसी पहलें भी की जा रही हैं।
इसके अलावा, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, 1.57 अरब यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग और 100% फ्लाई ऐश का इस्तेमाल जैसे कदम दिखाते हैं कि कंपनी पर्यावरण को लेकर गंभीर है। यही वजह है कि उसे वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिल रही है।