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बसना : दो साल स्कूल कैप्टन रहीं ईशा गुप्ता ने आईएससी 12वीं में लहराया परचम

कला संकाय में उत्कृष्ट प्रदर्शन, अब साइकोलॉजिस्ट बनकर लोगों की सेवा करना चाहती हैं

मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर सेंट स्टीफेंस मॉडल स्कूल जगदीशपुर की छात्रा ईशा गुप्ता ने आईएससी कक्षा 12वीं परीक्षा 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते 87.3 प्रतिशत के साथ विद्यालय में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। 

कला संकाय की छात्रा ईशा की इस उपलब्धि से न केवल विद्यालय बल्कि पूरे नगर में खुशी का माहौल है। ईशा गुप्ता बचपन से ही पढ़ाई के साथ नेतृत्व क्षमता के लिए भी जानी जाती रही हैं।लगातार दो वर्षों तक स्कूल कैप्टन रहकर उन्होंने विद्यालय में अनुशासन, जिम्मेदारी और नेतृत्व का उत्कृष्ट परिचय दिया। यही कारण है कि शिक्षक भी उन्हें एक मेहनती, विनम्र और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्रा मानते हैं। ईशा की सफलता इसलिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने हर कक्षा में निरंतर मेहनत करते हुए खुद को बेहतर बनाया। 

कक्षा 10वीं में 65 प्रतिशत और 11वीं में 69 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि लगातार मेहनत कर 12वीं में 87.3 प्रतिशत के साथ उल्लेखनीय प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि लगन और निरंतर प्रयास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। ईशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता शीत गुप्ता, माता आशा गुप्ता, परिवारजनों, विद्यालय के प्राचार्य विजय दास तथा सभी शिक्षकों को दिया है। 

उन्होंने कहा कि माता-पिता के विश्वास, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। ईशा का सपना आगे चलकर साइकोलॉजिस्ट बनना है। उनका कहना है कि आज के दौर में मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहे लोगों को सही मार्गदर्शन और भावनात्मक सहयोग की जरूरत है। वे भविष्य में इसी क्षेत्र में कार्य कर समाजसेवा करना चाहती हैं। ईशा की बड़ी बहन साक्षी गुप्ता भी इसी विद्यालय की छात्रा रह चुकी हैं और वर्तमान में हाईकोर्ट बिलासपुर में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। परिवार की इस शैक्षणिक परंपरा ने भी ईशा को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

ईशा के पिता एवं नगर उपाध्यक्ष बसना शीत गुप्ता ने कहा कि यह हमारे परिवार के लिए बेहद गर्व और खुशी का क्षण है। ईशा ने नर्सरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई सेंट स्टीफेंस मॉडल स्कूल से ही की है। दो वर्षों तक स्कूल कैप्टन के रूप में मिली जिम्मेदारियों ने उसके व्यक्तित्व को और मजबूत बनाया। विद्यालय के शिक्षकों के संस्कार और मार्गदर्शन ने ही उसे इस मुकाम तक पहुँचाया है। उन्होंने विद्यालय परिवार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ईशा की इस सफलता से दादा-दादी, नाना-नानी सहित पूरे परिवार में उत्साह का माहौल है।


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