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सांकेतिक चित्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा निर्मित

महासमुंद जिले में साँसे भी नहीं सुरक्षित, सुशासन दिवस में क्या प्रशासन स्वयं संज्ञान लेकर करेगा कोई पहल ?

छत्तीसगढ़ प्रदेश में इस समय सुशासन दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन यह कैसा सुशासन है कि प्रदेश के एक जिले नागरिकों की साँसे भी अब सुरक्षित नहीं है, बावजूद इसके प्रशासन कोई पहल नही करता है, क्या प्रशासन को केवल आवेदन का इंतज़ार रहता है.

सबसे पहले बात करते हैं महासमुंद शहर की यहाँ की समस्या से स्वयं भाजपा नेता ही परेशान हो राष्ट्रीय तेली कर्मा सेना के संस्थापक व भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अशवंत तुषार साहू ने बताया कि महासमुंद में बरौडा चौक से मचेवा कलेक्टोरेट मार्ग तक निर्माणाधीन सड़क से राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

काम की रफ्तार धीमी होने के कारण स्थानीय लोग इससे काफी परेशान हैं, वहीं सड़क चौड़ीकरण और डिवाइडर निर्माण के कारण मार्ग की स्थिति बदहाल है ट्रैफिक के भारी दबाव के चलते, यहाँ धूल, गिट्टी से हादसों का खतरा बढ़ गया है.

धूल, गिट्टी और गंदगी के साथ निर्माण के कारण उड़ने वाली धूल से राहगीरों को सांस लेने में दिक्कत और बीमारीयां होने लगी है, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की स्थिति बेवहज इससे बिगड़ जाती है. जिले में लागातार लोगों को सांस लेने में समस्या आ रही है, जिसकी वजह धुम्रपान नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों को ताक में रखकर विकास कार्य करना है, इससे नागरिकों का विकास हो रहा या विनाश यह तो यहाँ रहने वाले नागरिक ही जाने.      

वहीं जिले के बसना नगर की बात करें तो यहाँ स्थिति और भी ख़राब है, धुल के साथ यहाँ लोगों को धुएं की भी दोहरी मार झेलनी पड़ रही है, प्लास्टिक कागज़ सहित, कई तरह के खतरनाक जहरीले पदार्थ सड़कों पर खुले आम जलाया जा रहा है, जिसपर प्रशासन किसी तरह की कोई कार्रवाई करता नजर नहीं आता है.  


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