बसना : 20 से 25 मई तक भीषण गर्मी में व्याख्याताओं का प्रशिक्षण बना चिंता का विषय
20 से 25 मई तक भीषण गर्मी में व्याख्याताओं का प्रशिक्षण बना चिंता का विषय
ऑनलाइन या 15 जून के बाद प्रशिक्षण आयोजित करने की उठी मांग
छत्तीसगढ़ संदेश । सी. डी. बघेल। बसना।
क्षेत्र में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे व्याख्याताओं के प्रशिक्षण को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। अनेक व्याख्याताओं ने 20 मई से 25 मई तक प्रस्तावित प्रशिक्षण को ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करने अथवा 15 जून के बाद कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान मौसम परिस्थितियों में दोपहर की तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच आवागमन करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।
विकासखंड स्रोत केंद्र – समग्र शिक्षा बसना द्वारा जारी आदेश के अनुसार हाई एवं हायर सेकेंडरी स्तर के कला समूह, भाषा समूह, वाणिज्य समूह एवं कृषि समूह के कुल 132 व्याख्याताओं का पांच दिवसीय गैर-आवासीय प्रशिक्षण 20 मई से 25 मई 2026 तक सेजेस बसना में आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक चलेगा। 24 मई को रविवार होने के कारण अवकाश रहेगा।
व्याख्याताओं का कहना है कि इन दिनों क्षेत्र में तापमान लगातार बढ़ रहा है तथा दोपहर के समय लू का असर अत्यधिक तेज हो जाता है। अस्पतालों में भी लू, चक्कर, डिहाइड्रेशन और गर्मी से संबंधित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
ऐसे में दोपहर 1:30 बजे प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद व्याख्याताओं को दूर-दराज क्षेत्र के अपने घरों तक यात्रा करनी पड़ेगी, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है। व्याख्याताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में पेट्रोल-डीजल संकट को देखते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा भी डिजिटल माध्यमों और वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है।
कई विभागों में गूगल मीट और जूम मीटिंग के माध्यम से बैठकें एवं प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग भी तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए व्याख्याताओं का प्रशिक्षण ऑनलाइन माध्यम से आयोजित कर सकता है। व्याख्याताओं का मानना है कि ऑनलाइन प्रशिक्षण से न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत होगी, बल्कि भीषण गर्मी में अनावश्यक आवागमन से भी राहत मिलेगी। इससे शिक्षकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के साथ-साथ समय और संसाधनों की भी बचत होगी।
कुछ व्याख्याताओं ने यह सुझाव भी दिया है कि यदि ऑनलाइन प्रशिक्षण संभव नहीं हो तो प्रशिक्षण कार्यक्रम को 15 जून के बाद आयोजित किया जाए, जब मौसम अपेक्षाकृत सामान्य हो जाएगा। फिलहाल शिक्षा विभाग के आदेश के बाद व्याख्याताओं में इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है तथा वे विभागीय स्तर पर प्रशिक्षण व्यवस्था में बदलाव की अपेक्षा कर रहे हैं।