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बसना : भाजपा सरकार के खिलाफ फुट रहा किसानों का गुस्सा, सोशल मीडिया पर दर्द कर रहे बयां

3100 रुपये प्रति क्विंटल, 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीद होने के बावजूद बसना क्षेत्र के किसान छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार से नाराज नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर लगातार किसानों का गुस्सा भाजपा सरकार के प्रति बढ़ता नजर आ रहा है.

यहाँ तक कि खुद को कट्टर भाजपा भक्त बताने वाले किसान भी अब पूछने लगे हैं कि क्या यही किसानों के लिए अच्छे दिन हैं ?

वातानुकूलित कक्ष में बैठकर कितनी ही बड़ी कागजी योजनायें क्यों ना बनाई जाए, अख़बारों में बड़ी-बड़ी सुर्ख़ियों के साथ कितनी ही फोटो क्यों ना लगवाई जाए, जनता के पैसे से विज्ञापनों की बड़ी-बड़ी होर्डिंग क्यों ना लगवाई जाए इन दावों की सारी पोल तभी खुल जाती है जब सोसायटी में जाने वाला किसान यह कहता है कि किसानों को पिछले दो साल में खाद के लिए जितना रुलाया गया है जिंदगी भर भूल नहीं पायेंगे.

बसना क्षेत्र के किसान बेदलाल साव सोशल मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप में लिखते हैं कि मैं पहले कट्टर भाजपा भक्त था, लेकिन पिछले दो साल में किसानों को खाद के लिए जितना रुलाया गया है, शायद जिंदगी भर भूल नहीं पाएंगे. पिछला यूरिया 750 रुपये में मिला फिर 2000 रुपये में भी नहीं मिल पाया.

बेदलाल साव बताते हैं कि इस साल 500 रुपये के औसत कीमत पर यूरिया मिल रहा था, लेकिन पिछले दो दिनों में यह कीमत 800 रुपये तक पहुँच गया है. इसके साथ कुछ दवाई या विटामिन बेवजह खरीदवाया जा रहा है.

यहाँ तक किसान अब यह भी कह रहे हैं कि इसके पूर्व भूपेश बघेल के कार्यकाल में किसानों को आसानी से खाद मिल जाता था, अब खाद के लिए पहले पता लगाना पड़ता है. क्या किसानों के लिए यही अच्छे दिन है ?

एक सच्चाई यह भी है कि भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों पर अपनी जो छाप छोड़ी है, वह लोग आज भी नहीं भूल पायें है, चाहे वह छत्तीसगढ़ की संस्कृति को लेकर हो या फिर अपने भेंट मुलाक़ात कार्यक्रम में जनता के बीच जाकर उनका वह संवाद और त्वरित फैसले. भूपेश बघेल की लोकप्रियता अब भी पहले पायदान पर बरकरार है.

वहीँ मनोरंजन पात्र कहते है कि व्यापारियों के स्टॉक में पर्याप्त खाद है और शासन सोसायटी में पर्याप्त खाद भेज नहीं पा रही है, इसका मतलब सरकार ‘निकम्मी’ है या तो व्यापारियों की सरकार है.

वहीं सरायपाली क्षेत्र के एक भाजपा नेता ताराचंद साहू अपने फेसबुक अकाउंट से पोस्ट कर मुख्यमंत्री से निवेदन करते हैं कि जितने भी खाद दूकान संचालित हैं, उनका यूरिया, सुपर, डीएपी स्टॉक सार्वजनिक किया जाए.

उनका कहना कि खाद व्यापारी 600 से 700 रुपये में बेच रहे हैं, जिसके चलते किसानों की भारी भरकम बोझ झेलना पड़ रहा है.

वहीँ एक किसान ने डिब्बे पेट्रोल-डीजल प्रतिबंधित किये जाने के फैसले पर पूछा कि किसान डिब्बा में डीजल लेने जाता है या उद्योगपति ? पेट्रोल-डीजल के डिब्बे पर प्रतिबन्ध लगाये जाने से भी किसान नाराज होते नजर आ रहे हैं, किसान खेत में खड़े ट्रैक्टर के लिए डिब्बों से डीजल ले जाया करते थे, इस आदेश के बात उनमे साफ चिंता दिखाई दे रही है.

इसके अलावा इस बार क्षेत्र के किसानो में इस बात की भी नाराजगी देखि गई कि जहाँ पड़ोसी राज्य में रबी की फसल को 3000 में खरीदा गया वहीँ बसना मंडी में नीलामी का भाव 1600 तक भी नहीं जा रहा था. जबकि बसना क्षेत्र से अवैध रूप से ओडिशा के पदमपुर में धान खपाया जा रहा था.

वहीँ राष्ट्रीय बजरंग दल के नेता महेंद्र साव ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी व्यापारियों से सांठ-गांठ कर दुकानदार से दुगुनी कीमत पर खाद बिकवा रहे हैं.

भले ही प्रशासन द्वारा आये दिन कई खाद व्यापारियों पर कारवाई कर उसके लिए विज्ञाप्ति जारी करती है, लेकिन किसानों की जुबां कुछ और ही बयां करती है.


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अविनाश नायक

मैं डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ और टेक-सैवी पत्रकार हूँ, जो पिछले 9 वर्षों से छत्तीसगढ़ सहित महासमुंद, सरायपाली, बसना और पिथौरा क्षेत्र की स्थानीय खबरों के साथ, देश-विदेश एवं शासकीय योजनायें, रोजगार अथवा बैंकिंग से सम्बंधित समाचार प्रकाशित करता हूँ। पत्रकारिता के साथ-साथ मुझे Windows VPS सर्वर, IIS कॉन्फ़िगरेशन, SQL सर्वर और MVC, .NET, C# जैसी एडवांस तकनीकों का गहरा व्यावहारिक अनुभव है. इसके पूर्व करीब 6 वर्ष तक का मेरा सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामर के रूप में अनुभव रहा है.
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