बसना : गढ़फूलझर भंडारण केंद्र के पास लगी भीषण आग, 200 एकड़ क्षेत्र में पैरा जलकर राख
7 एकड़ से अधिक धान फसल नुकसान की प्रारंभिक सूचना, दमकल की मदद से टला बड़ा हादसा
गढ़फूलझर स्थित भंडारण केंद्र के समीप सोमवार दोपहर लगभग 3 बजे भीषण आग लगने से करीब 200 एकड़ क्षेत्र में फैले खेतों का पैरा जलकर राख हो गया। तेज गर्मी और हवा के कारण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। आग धीरे-धीरे फैलते हुए भंडारण केंद्र परिसर तक पहुंच गई, जिससे कुछ समय के लिए बड़े नुकसान की आशंका बढ़ गई थी।
सूचना मिलने के बाद सरायपाली से दमकल वाहन को तत्काल गढ़फूलझर बुलाया गया, जिसने शाम लगभग 4 बजे मौके पर पहुंचकर बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। दमकल कर्मियों और कर्मचारियों की तत्परता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष भंडारण केंद्र में धान भंडारण नहीं होने के कारण इस बार केंद्र खाली था, जिससे बड़ी क्षति नहीं हुई। हालांकि परिसर में रखे खाली और अनुपयोगी वारदाने आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर राख हो गए। इसके अलावा केंद्र में रखे पुराने कैप कवर भी आग में नष्ट हो गए।
वर्तमान में भंडारण केंद्र में वर्ष 2013-14 का लगभग 400 क्विंटल अमानक धान का स्टैग रखा हुआ है, जो आग की चपेट में आने से बाल-बाल बच गया। यदि आग इस हिस्से तक पहुंच जाती तो बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता था।
स्थानीय कर्मचारियों के अनुसार खेतों में फसल कटाई के बाद पैरा जलाने की घटनाएं हर वर्ष सामने आती हैं। किसानों को कई बार समझाइश देने के बावजूद कुछ लोग खेतों में आग लगा देते हैं, जो तेज हवा के कारण फैलकर भंडारण केंद्र और आसपास के जंगलों तक पहुंच जाती है।
कर्मचारियों ने बताया कि वर्ष 2017 में भी मई माह के दौरान इसी प्रकार की बड़ी घटना हुई थी, जिसमें भंडारण केंद्र में रखे धान स्टैग का एक हिस्सा जल गया था। उस समय भी दमकल की मदद से आग पर नियंत्रण पाया गया था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग से 7 एकड़ से अधिक क्षेत्र में लगी धान फसल जलकर राख हो गई है, वहीं बड़ी मात्रा में खेतों का पैरा भी नष्ट हो गया। जिन किसानों की फसल प्रभावित होने की जानकारी मिली है, उनमें साल्हेझरिया निवासी अरविंद भोई की लगभग 5 एकड़, आमापाली निवासी दयानंद राणा की 2 एकड़ तथा चिंतामणि राणा की लगभग आधा एकड़ धान फसल आग की चपेट में आ गई है। बताया जा रहा है कि चिंतामणणि राणा आमापाली निवासी हैं, जबकि उनका खेत गढ़फूलझर क्षेत्र में स्थित है।
क्षेत्र में इन दिनों रबी फसलों की कटाई के बाद खेतों में पड़े पैरा को जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसके कारण प्रतिदिन फसलों और पैरा के नुकसान की घटनाएं सामने आ रही हैं। साथ ही खेतों में लगे बोरवेल और अन्य कृषि संसाधनों को भी नुकसान पहुंचने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने पैरा जलाने की घटनाओं पर सख्ती बरतने तथा जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।