महासमुंद : मानसून में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
आगामी मानसून को देखते हुए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव द्वारा जिले के समस्त खण्ड चिकित्सा अधिकारियों को मौसमी बीमारियों एवं संभावित आपदाओं से बचाव तथा राहत व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही आमजनों से वर्षा ऋतु के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की अपील की गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राव ने बताया कि वर्षा ऋतु में उल्टी-दस्त, मलेरिया, पीलिया तथा अन्य संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। समय पर रोकथाम एवं उपचार नहीं मिलने पर ये बीमारियां गंभीर और जानलेवा भी साबित हो सकती हैं। उन्होंनेे बताया कि दस्त की स्थिति में व्यक्ति को बार-बार शौच जाना पड़ता है तथा मल ढीला और तरल हो जाता है। सामान्यतः दस्त दो से तीन दिनों तक रहते हैं, लेकिन यदि तीन दिनों से अधिक समय तक बने रहें या मरीज की स्थिति बिगड़ने लगे तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। इसके लिए 104 आरोग्य सेवा केंद्र से निःशुल्क परामर्श प्राप्त किया जा सकता है अथवा निकटतम अस्पताल एवं स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि दस्त के प्रमुख कारणों में वायरस एवं बैक्टीरिया जनित संक्रमण, दूषित भोजन एवं पानी का सेवन, अस्वच्छता तथा अधपके भोजन का सेवन शामिल हैं। इससे बचाव के लिए खाने-पीने की वस्तुओं और पानी को ढंककर रखने, ताजा भोजन करने, बासी एवं सड़े-गले फलों से परहेज करने तथा भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की सलाह दी गई है।
पेयजल को उबालकर या क्लोरीन की गोली डालकर उपयोग करने पर भी जोर दिया गया है। दस्त होने पर शरीर में पानी की कमी रोकने के लिए ओआरएस घोल का सेवन करते रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा नारियल पानी, नमकीन लस्सी, नींबू की शिकंजी, चावल का मांड, हल्की चाय और दाल का पानी जैसे तरल पदार्थों का सेवन लाभकारी बताया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि मानसून के दौरान स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त करें, ताकि गंभीर स्थितियों से बचा जा सके।