क्या उमेश पटेल संभालेंगे छत्तीसगढ़ कांग्रेस की कमान ?
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल आगामी 9 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है, जिसके बाद नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर रायपुर से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान इस बार संगठन की कमान किसी युवा, शिक्षित और ऊर्जावान नेता को सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
नए प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री एवं खरसिया विधायक उमेश पटेल का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में उभरकर सामने आया है। युवाओं, छात्र राजनीति और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपे जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। राजनीतिक गलियारों में उमेश पटेल की दावेदारी को सबसे मजबूत माना जा रहा है।
हालांकि वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज भी दौड़ में बने हुए हैं। आदिवासी वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका को देखते हुए पार्टी उन्हें दोबारा अवसर देने पर भी विचार कर सकती है। वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने भी सार्वजनिक रूप से प्रदेशाध्यक्ष बनने की इच्छा जताई है।
कांग्रेस ने पिछले वर्ष जिला स्तर पर बड़े पैमाने पर युवा चेहरों को जिम्मेदारी देकर संगठन में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत दिया था। अब माना जा रहा है कि इसी रणनीति को प्रदेश स्तर पर भी लागू किया जा सकता है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा अभनपुर में प्रस्तावित जिला अध्यक्षों के दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के बाद संगठनात्मक बदलाव को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस शिविर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के शामिल होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कार्यक्रम के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नए नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।
फिलहाल कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों की नजरें आलाकमान के फैसले पर टिकी हुई हैं, जहां युवा नेतृत्व और संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखते हुए उमेश पटेल के नाम पर गंभीर मंथन जारी बताया जा रहा है।
उमेश पटेल की मजबूत दावेदारी के पीछे कई कारण
उमेश पटेल को छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सबसे शिक्षित, युवा और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। राजनीति में आने से पहले वे विदेश में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। पारिवारिक राजनीतिक विरासत और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत पहचान दिलाई है।
उनके पिता स्वर्गीय नंदकुमार पटेल खरसिया विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे तथा अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति के प्रमुख कांग्रेस नेताओं में उनकी गिनती होती थी। वर्ष 2013 में हुए झीरम घाटी नक्सली हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बड़े पुत्र दिनेश पटेल शहीद हो गए थे। इस दुखद घटना के बाद उमेश पटेल ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और जनता तथा संगठन के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
उमेश पटेल लगातार तीन बार खरसिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए हैं तथा भूपेश बघेल सरकार में उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। शांत, सौम्य और अध्ययनशील व्यक्तित्व के कारण वे संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय माने जाते हैं।
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर गांधी परिवार के साथ उनके परिवार के लंबे समय से निकट संबंध रहे हैं। राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक क्षमता, युवा नेतृत्व, स्वच्छ छवि और मजबूत जनाधार के कारण उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए एक मजबूत और स्वाभाविक दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
उमेश पटेल पूर्व में छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भी रह चुके हैं। युवा कांग्रेस के नेतृत्व के दौरान उन्होंने प्रदेशभर में संगठन को मजबूत करने और युवाओं को कांग्रेस की विचारधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इसी कारण उनकी पकड़ केवल अपने विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक ढांचे में उनकी मजबूत पहचान और प्रभाव माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और संगठनात्मक अनुभव उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में अन्य दावेदारों की तुलना में विशेष बढ़त प्रदान करता है।