सरायपाली : खुद को स्वयंभू समझ बैठे हैं नगरपालिका के अधिकारी ! जनदर्शन से लेकर तहसीलदार के आदेश... सब बेअसर
नगरपालिका सरायपाली में अवैध कब्ज़ाधारियों के हौसले बुलंद हैं, लगातार शिकायत के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से आज स्थिति यह हो चुकी है यह कब्ज़ा धीरे-धीरे बढ़ने लगा है, जिसके चलते भविष्य में नगरवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.
मिली जानकारी के अनुसार जिस मार्ग पर अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है, वहां भविष्य में नया बस स्टैंड बनाने की योजना भी है, लेकिन नगरीय प्रशासन को इस बात की कोई परवाह ही नही है.
इस मामले की शिकायत को 2 वर्ष से भी अधिक का समय बीत चूका है, लेकिन नगरपालिका में स्वयंभू बने अधिकारीयों को कोई परवाह ही नहीं.
अनुविभागीय अधिकारी के आदेश को अनदेखा करते हुए नगरपालिका अधिकारी अपनी मनमानी में लगे हैं, यह कोई पहला मामला नही, जहाँ पालिका खुद को स्वयंभू समझ बैठता है, पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिसमे पालिका उच्च अधिकारीयों के आदेश का पालन करने में आनाकानी करता है.
इससे कहीं ना कहीं नगर में हो रहे अवैध अतिक्रमण में नगरपालिका की भूमिका नजर आती है, जिसमे सांठ-गांठ कर अतिक्रमणकर्ताओं को दस्तावेज बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध करवा देते हैं.
हमारे पास शिकायतकर्ता की एक ऐसी दस्तावेज हाथ लगी है जो नगरपालिका प्रशासन के व्यवस्था की पोल खोलता है.
इस मामले में वार्ड क्रमांक 15 सरायपाली में अवैध निर्माण कार्य की शिकायत को लीलाधर नायक ने अन्य वार्डवासियों के साथ 11 जनवरी 2024 को शिकायत की थी.
शिकायत के बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सरायपाली ने इस मामले में अतिक्रमण हटाने हेतु आदेश जारी किया था, लेकिन आदेश का अनुपालन नहीं होने से धीरे-धीरे कब्ज़ाधारी वहां पक्का मकान बनाने लगे.
अनुविभागीय अधिकारी के आदेश का अनुपालन नहीं होने से परेशान शिकायतकर्ता 2 साल के लम्बे इन्तजार बाद कलेक्टर जनदर्शन पहुँचे जहाँ उन्हें उम्मीद थी कि अब जल्द से जल्द कार्रवाही हो जाएगी.
02 फरवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में दिए गए आवेदन के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी कलेक्टर ने फ़ाइल अनिविभागीय अधिकारी तक पहुँचाया उन्हें जाँच सुनिश्चित किये जाने को कहा गया.
इसके बाद अनिविभागीय अधिकारी ने 03 मार्च 2026 को इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तहसीलदार के पास फ़ाइल को बढ़ा दी, जिसके बाद तहसीलदार ने 6 अप्रैल 2026 को नगरपालिका सरायपाली को जाँच कर अतिक्रमण हटाने हेतु प्रतिवेदन के साथ ज्ञापन जारी किया.
इस मामले के उच्च अधिकारिओं से तीन-तीन बार जाँच के आदेश मिलने पर भी नगरपालिका के अधिकारी इसे अनदेखा कर रहे हैं, जिसके चलते कार्रवाई पूरी नहीं हो पा रही है. ऐसे में सवाल यह है कि जो उच्च अधिकारीयों के आदेश का पालन नहीं करते क्या ऐसे अधिकारीयों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए, नगरीय प्रशासन की ओर से कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि वे कलेक्टर अथवा अनुविभागीय अधिकारियों के आदेश का पालन नहीं करते.