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सरायपाली : कलेक्टर ने मांगी थी 15 दिन में जांच रिपोर्ट, डेढ़ साल बाद भी फाइल डीईओ कार्यालय में अटकी

जिले में सुशासन के दावों और हकीकत के बीच का फर्क एक बार फिर उजागर होता दिखाई दिख रहा है। कलेक्टर कार्यालय महासमुन्द से एक शिकायत मामले में 15 दिवस के भीतर जांच कर रिपोर्ट देने का स्पष्ट निर्देश जारी हुआ है। लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी एक मामले का शिकायत आवेदन में डेढ वर्ष से जांच शुरू तक नही किये है। बल्कि शिकायत आवेदन को दबा कर बैंठे हुए है।

मालूम हो कि आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने 26 दिसम्बर 2024 को विनय लंगेह कलेक्टर महासमुन्द को शिकायत किया है। जिसमें आरोप लगाया है कि बीईओ कार्यालय सरायपाली में नियम विपरीत फर्जी तरीके से यात्रा देयक तैयार करके शासन को क्षति पहुंचाया है। जिसकी जांच कराने की मांग किया है। जिसमें अपर कलेक्टर ने 15 जनवरी 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द को 15 दिवस में जांच पूर्ण करने का आदेश दिया।

हैरत की बात है कि यह शिकायत पर पिछले डेढ साल से जांच लंबित है। मामले को लेकर सबसे बडा सवाल यह उठ रहा है कि जिस तात्कालीन बीईओ सरायपाली के कार्यकाल पर आरोप लगे है, वो अब डीईओ महासमुन्द कार्यालय में सहायक संचालक के रूप में पदस्थ हो चुका है। ऐसे में इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की उम्मीद कैसे की जाए। कथित वित्तीय अनियमितता की जांच कब पूरी होगा। दोषियो पर क्या कार्रवाई होगा। यह सवाल आम लोगो के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

बी0एल0 देवागंन जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द ने बताया कि मुझे इस शिकायत के संबंध में मालूम नही है। आपने बताया तो अभी पता चला है। शिकायत शाखा से फाइल मंगवाकर देखता हूं।


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अविनाश नायक

मैं डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ और टेक-सैवी पत्रकार हूँ, जो पिछले 9 वर्षों से छत्तीसगढ़ सहित महासमुंद, सरायपाली, बसना और पिथौरा क्षेत्र की स्थानीय खबरों के साथ, देश-विदेश एवं शासकीय योजनायें, रोजगार अथवा बैंकिंग से सम्बंधित समाचार प्रकाशित करता हूँ। पत्रकारिता के साथ-साथ मुझे Windows VPS सर्वर, IIS कॉन्फ़िगरेशन, SQL सर्वर और MVC, .NET, C# जैसी एडवांस तकनीकों का गहरा व्यावहारिक अनुभव है. इसके पूर्व करीब 6 वर्ष तक का मेरा सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामर के रूप में अनुभव रहा है.
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