बसना : गरीबी नहीं रोक सकी कदम, योगाचार्य भगवान दास यादव बना रहे स्वस्थ और संस्कारित समाज
आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव, बच्चों पर शैक्षणिक दबाव और समाज में फैलती नशे की प्रवृत्ति के बीच योग केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और आत्मबल से जुड़े जीवन का आधार बनकर उभरा है।
इसी विचार को जीवन का संकल्प बनाकर पिथौरा विकासखंड के ग्राम गड़बेड़ा के 42 वर्षीय युवा योगाचार्य भगवान दास यादव पिछले 14 वर्षों से महासमुंद जिले सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में योग की अलख जगा रहे हैं और हजारों लोगों को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का संदेश दे रहे हैं। उनकी यात्रा संघर्ष, साधना और सामाजिक समर्पण का उदाहरण है। वर्ष 2000 में दसवीं उत्तीर्ण करने के बाद आर्थिक अभावों के कारण नियमित पढ़ाई जारी रखना संभव नहीं हो सका।
परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने वर्षों तक जूता-चप्पल दुकान और टोल प्लाजा में काम किया, लेकिन राष्ट्रसेवा और समाज के लिए कुछ करने का संकल्प नहीं छोड़ा। वर्ष 2008-09 में ओपन माध्यम से बारहवीं उत्तीर्ण करने के साथ योग को जीवन का मार्ग चुना। योग के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने पतंजलि योग समिति और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के शिविरों से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनके गुरु राज्य सह-राज्य प्रभारी छबिलाल साहू तथा जिला प्रभारी तिलक साव का उन्हें मार्गदर्शन मिलता रहता है। वर्ष 2008 से 2011 तक योग की शिक्षा लेने के बाद वर्ष 2012 से उन्होंने स्वमं क्षेत्र में योग प्रशिक्षण देना शुरू किया।
उनकी लगन और योग के प्रति समर्पण को देखते हुए छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा सहित उनके गुरुओं ने उन्हें उन्नत प्रशिक्षण और व्यवस्थित योग शिक्षा के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2017 में छत्तीसगढ़ योग आयोग समाज कल्याण विभाग, पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़, वर्ष 2018 में पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में बाबा रामदेव के सानिध्य में प्रशिक्षण प्राप्त किया औऱ 2019 में आईएसएमबी यूनिवर्सिटी छुरा गरियाबंद से डिप्लोमा प्राप्त कर योग को जनजागरण का माध्यम बनाया।
इसी दौरान सामाजिक और राष्ट्र निर्माण की सोच के साथ वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े और पिछले 17–18 वर्षों से सक्रिय भूमिका निभाते हुए वर्तमान में खंड स्तर पर सह बौद्धिक प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनका मानना है कि स्वस्थ शरीर, श्रेष्ठ विचार और अनुशासित समाज ही मजबूत राष्ट्र की पहचान है। आज योगाचार्य भगवान दास यादव विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में योग शिविरों के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों और लोगों को अष्टांग योग, प्राणायाम, ध्यान और अनुशासित जीवनशैली का संदेश दे रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से आयुष्मान आरोग्य मंदिर, शासकीय आयुर्वेद औषधालय घोच में प्रतिदिन प्रातः योग प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
उनकी यही कार्यशैली, लगन और निरंतर मेहनत का परिणाम है कि उन्हें महासमुंद जिले के सर्वश्रेष्ठ योग शिक्षक सहित स्थानीय स्तर पर अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। योगाचार्य श्री यादव छतीसगढ योग आयोग के कार्यो सक्रियता भाग लेते है। वे छतीसगढ पतंजलि योगपीठ के सदस्य है उनक़्क़ मानना है कि आधुनिक जीवन में मानसिक तनाव अनेक बीमारियों की जड़ है और योग ही व्यक्ति को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति तथा आत्मिक संतुलन प्रदान कर सकता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भगवान दास यादव की यह यात्रा यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि संकल्प, अनुशासन और समाज के लिए समर्पण ही व्यक्ति को असाधारण बनाते हैं।