बसना : 74 की उम्र में भी युवाओं सा उत्साह, 20 वर्षों से गांव-गांव पहुंचा रहे स्वास्थ्य और संस्कार का संदेश
आज जब आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव, बच्चों पर शैक्षणिक दबाव और समाज में फैलती नशे की प्रवृत्ति नई पीढ़ी के सामने बड़ी चुनौती बन रही है, ऐसे समय में योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और श्रेष्ठ जीवन का आधार बनकर उभरा है।
इसी विचार को जीवन की साधना बनाकर बसना विकासखंड के गिधापाली निवासी 74 वर्षीय योगाचार्य डॉ. वृंदावन पटेल पिछले 20 वर्षों से बिना किसी शुल्क और बिना किसी अपेक्षा के गांव-गांव, विद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुंचकर हजारों लोगों को योग, स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवन का संदेश दे रहे हैं।
उम्र भले 74 वर्ष हो, लेकिन ऊर्जा और अनुशासन देखकर लोग आज भी उन्हें 50 वर्ष से कम का मान बैठते हैं। योगाचार्य डॉ. वृंदावन पटेल का समर्पण ऐसा है कि वे आज भी अपने निजी खर्च से 50 किलोमीटर से दूर वनांचल क्षेत्र बम्हनी जैसे गांवों तक पहुंचकर लोगों को निःशुल्क योग प्रशिक्षण देते हैं। उनका उद्देश्य केवल योग सिखाना नहीं, बल्कि लोगों को तनावमुक्त, रोगमुक्त और आत्मविश्वास से भरपूर जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है।
हरिद्वार स्थित बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ में उन्होंने योगाभ्यास, स्वास्थ्य प्रणाली, अनुशासन, आसन, एकाग्रता, प्राकृतिक संतुलन और उपचारात्मक योग का प्रशिक्षण प्राप्त किया। योग के प्रति उनके समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए वर्ष 2009 में उन्हें पतंजलि योगपीठ हरिद्वार द्वारा आदर्श योग शिक्षक की उपाधि से सम्मानित किया गया।तब से लेकर आज तक वे फुलझर अंचल के सरायपाली, बसना, पिथौरा सहित अनेक क्षेत्रों के विद्यालयों, महाविद्यालयों और सैकड़ों गांवों में योग शिविर आयोजित कर चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में हजारों विद्यार्थी और नागरिक अष्टांग योग, प्राणायाम, ध्यान और संतुलित जीवनशैली से जुड़े हैं।
डॉ. पटेल बताते हैं कि शुरुआती दौर में गांवों में लोग योग को केवल साधु-संतों तक सीमित मानते थे और शिविरों में गिने-चुने लोग आते थे। लेकिन समय के साथ लोगों ने योग की शक्ति को समझा, विशेषकर कोरोना काल के बाद योग जनजीवन का हिस्सा बनता गया। उनका मानना है कि मानसिक तनाव आज अनेक शारीरिक और सामाजिक समस्याओं की जड़ है और नियमित योग जीवन में संतुलन, शांति और नई ऊर्जा देता है। योग के साथ सामाजिक और राष्ट्र चेतना से जुड़े डॉ. पटेल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य और छत्तीसगढ़ पतंजलि योगपीठ से जुड़े हुए हैं। उनके सिखाये लोग आज भी जब उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं तो वे इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उनका संदेश सरल लेकिन गहरा है स्वस्थ शरीर, सकारात्मक विचार और अनुशासित जीवन ही सुखी समाज और मजबूत राष्ट्र की पहचान है करो योग, रहो निरोग।
कई तरह के साध्य एवं जटिल रोगों में योग बन सकता है सहायक
योगाचार्य डॉ. वृंदावन पटेल बताते हैं कि आजकल व्यक्ति मानसिक तनाव से ग्रसित है, जिसके कारण अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याएं उसे प्रभावित कर रही हैं। इसका प्रभाव व्यक्ति के आर्थिक, पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। मानसिक तनाव और असंतुलित जीवनशैली के कारण उच्च एवं निम्न रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, थायराइड ग्रंथि का असंतुलन, वायु विकार, अस्थमा, संधिवात, अनिद्रा, सर्वाइकल, साइटिका, सिरदर्द तथा विद्यार्थियों में भय, हीन भावना और स्मरण शक्ति में कमी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। उनका मानना है कि रोगमुक्त, स्वस्थ, आनंदमय, समृद्ध एवं सुखी जीवन के लिए योग एक प्रभावी माध्यम है। प्राणायाम, शवासन, योग निद्रा, ध्यान, क्रिया योग एवं भक्ति योग जैसे अभ्यासों से शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त की जा सकती है।