बसना : 10 दिन पिछड़ गई बसना क्षेत्र की खेती, 10 मिनट की बारिश के साथ मानसून ने दी दस्तक
किसानों के चेहरों पर लौटी उम्मीद, खुर्रा बौनी तेज; धान बोवाई और नर्सरी की तैयारियों में जुटे किसान
लंबे इंतजार के बाद सोमवार को दोपहर 1:30 बजे बसना अंचल में मानसून ने दस्तक दी। करीब 10 मिनट तक हुई बारिश ने मौसम को खुशनुमा बना दिया और किसानों के चेहरों पर उम्मीद की नई चमक दिखाई दी। हालांकि मानसून की देरी के कारण बसना क्षेत्र में खेती का कार्य करीब 10 दिन पिछड़ गया है। किसान अब अच्छी और लगातार बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खरीफ सीजन की खेती पूरी गति से शुरू हो सके।
वर्तमान समय में बसना विकासखंड में खेती-किसानी का दौर चल रहा है। मानसून के आगमन में देरी के कारण खेतों की तैयारी और धान बोवाई प्रभावित हुई है। सामान्य समय की तुलना में इस वर्ष कृषि कार्य कुछ पीछे चल रहा है, लेकिन सोमवार को हुई बारिश के बाद किसानों ने खेती की तैयारियों को तेज कर दिया है।
बसना विकासखंड के बड़ेसाजापाली क्षेत्र में खुर्रा बौनी का कार्य तेज गति से चल रहा है। किसान मानसून की शुरुआती बारिश का लाभ उठाते हुए खेतों में सीधे धान बीज की बुआई कर रहे हैं। खुर्रा बौनी के लिए खेतों में पहले हल्की नमी की आवश्यकता होती है, बारिश होते ही किसानों ने इस कार्य को गति दी है। धान बीज अंकुरण के साथ हल्की हल्की बारिश की आवश्यकता होती है। और धान के पौधे चार इंच से ऊपर होते ही ज्यादा बारिश की जरूरत होती है।
वहीं दूसरी ओर मानसून का समय नजदीक आते देख रबी फसल लेने के बाद बंद किए गए बोरवेलों को किसान अब दोबारा चालू कर रहे हैं। बोरवेल वाले किसान अपने खेतों में पानी भरने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि मानसूनी बारिश के साथ बोरवेल के पानी का उपयोग करते हुए खेतों में लाई चोपी पद्धति से धान की बोनी शुरू की जा सके।
बसना विकासखंड के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से में लाई चोपी पद्धति से धान की खेती की जाती है। इस पद्धति में खेतों में पहले पानी भरकर कीचड़ मताई की जाती है, इसके बाद धान की बोवाई होती है। इसके लिए अभी क्षेत्र में अधिक बारिश की आवश्यकता है।
पर्याप्त वर्षा होने के बाद किसान खेतों को तैयार कर धान बोवाई के कार्य को आगे बढ़ाएंगे। वहीं करीब 10 प्रतिशत हिस्से में रोपा नर्सरी पद्धति से धान लगाया जाता है। किसान बोरवेल के पानी से खेतों में धान की नर्सरी तैयार करने में जुट गए हैं, ताकि समय रहते धान के पौधे रोपण योग्य तैयार हो सकें और सही समय पर खेतों में धान की रोपाई की जा सके।
गढ़फूलझर, कुरचुंडी, अमापाली और हाड़ापथरा क्षेत्र में टिकरा फसल ली जाती है। इन क्षेत्रों में भी किसान टिकरा फसल लगाने के लिए टिकरा खेत की तैयारी में जुट गए हैं। बारिश के अनुरूप कृषि कार्यों को गति देने की तैयारी की जा रही है। कृषि जानकारों के अनुसार शुरुआती बारिश खरीफ फसल के लिए शुभ संकेत है, लेकिन धान की खेती के लिए लगातार अच्छी बारिश जरूरी है। किसान खेतों की जुताई, बीज की व्यवस्था और अन्य कृषि तैयारियों में लगे हुए हैं।
बारिश के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रौनक लौट आई है। गर्मी और उमस से राहत मिलने के साथ किसानों में नई उम्मीद जगी है। बसना अंचल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। ऐसे में मानसून की दस्तक किसानों के लिए राहत लेकर आई है, लेकिन खेती को पूरी रफ्तार पकड़ने के लिए अच्छी और नियमित बारिश का इंतजार अभी भी बना हुआ है।