झमाझम बारिश से बसना अंचल में लौटी उम्मीद, खेतों की ओर बढ़े किसान; धान बोनी पकड़ेगी रफ्तार
बसना अंचल में गुरुवार को हुई व्यापक और झमाझम मानसूनी बारिश ने किसानों के चेहरों पर लंबे इंतजार के बाद मुस्कान लौटा दी। बुधवार रात शुरू हुई हल्की बारिश के बाद गुरुवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे से छह बजकर चालीस मिनट तक जोरदार वर्षा हुई। इसके बाद दिनभर रुक-रुककर फुहारों का दौर चलता रहा और शाम करीब साढ़े चार बजे से फिर तेज बारिश शुरू हो गई। दिनभर झड़ी जैसे बने मौसम ने पूरे क्षेत्र को तर-बतर कर दिया।
लगातार बारिश के कारण जनजीवन भी प्रभावित रहा। लोग आवश्यक कार्यों को छोड़कर घरों में ही रहे। बसना नगर में सामान्य दिनों की तुलना में बाजारों में चहल-पहल काफी कम रही। गांवों से प्रतिदिन आने वाले कई कर्मचारी भी बारिश के कारण दुकानों तक नहीं पहुंच सके, जिससे बाजार अपेक्षाकृत सूना दिखाई दिया।
दरअसल, एक जुलाई से अब तक बसना क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर केवल खंड वर्षा ही हो रही थी। कहीं चार-पांच गांवों में बारिश होती थी तो आसपास के गांव सूखे रह जाते थे। ऐसे असमान बारिश से किसान चिंतित थे । और कम बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पा रही थी।
गुरुवार की व्यापक बारिश ने पहली बार पूरे अंचल में मानसून की प्रभावी दस्तक का एहसास कराया। बसना क्षेत्र के अधिकांश गांवों में धान की खेती लाई-चोपी पद्धति से की जाती है। अब खेतों में पर्याप्त नमी आने के बाद धान बोनी का कार्य तेजी से शुरू होने की उम्मीद है।
अब तक किसान बोरवेल के सहारे खेतों में पानी पहुंचा रहे थे, लेकिन वह सीमित क्षेत्र तक ही प्रभावी हो पा रहा था। मानसूनी बारिश और बोरवेल के पानी के संयुक्त प्रभाव से खेतों में कीचड़ तैयार करना आसान होगा, जिससे लाई-चोपी पद्धति से धान की बोनी को गति मिलेगी। किसानों का कहना है कि शुक्रवार से खेतों में ट्रैक्टरों की आवाज फिर सुनाई देने लगेगी और खेती का काम तेज हो जाएगा।
हालांकि कृषि कार्य से जुड़े लोगों का मानना है कि पूरे क्षेत्र में धान की बोनी पूरी रफ्तार से संपन्न होने के लिए अभी भी कम से कम एक सप्ताह तक इसी प्रकार की नियमित और व्यापक बारिश की आवश्यकता होगी। यदि मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो इस वर्ष खेती की स्थिति काफी बेहतर रहने की उम्मीद है।
वहीं, बसना विकासखंड के बड़े साजापाली क्षेत्र में अधिकांश किसानों ने पहले ही खुर्रा बोनी पद्धति से धान की बुवाई कर दी थी। कुछ दिन पहले हुई वर्षा से वहां धान के बीज अंकुरित हो कर पौधे डेढ़ से दो इंच तक बढ़ चुके हैं। गुरुवार की बारिश से इन पौधों की बढ़वार को भी पर्याप्त लाभ मिलेगा और फसल के बेहतर विकास की संभावना बढ़ गई है।
पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में कमजोर बारिश और उमस भरे मौसम के कारण किसानों के बीच मौसम वैज्ञानिकों द्वारा जताई गई अल नीनो की आशंकाओं को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी। लेकिन गुरुवार की व्यापक और लगातार हुई बारिश ने फिलहाल उन आशंकाओं को काफी हद तक दूर कर दिया है। किसानों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में भी मानसून इसी तरह मेहरबान रहा तो इस वर्ष धान की खेती अच्छी होगी और उत्पादन के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।