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महासमुंद में धान खरीदी में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप, कांग्रेस ने एफआईआर और निष्पक्ष जांच की मांग की

महासमुंद जिले की धान खरीदी समितियों में कथित करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेता अंकित बागबाहरा ने प्रेसवार्ता में दावा किया कि भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों की मिलीभगत से धान खरीदी केंद्रों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और प्राधिकृत अध्यक्षों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

महासमुंद प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में अंकित बागबाहरा ने कहा कि जिले की विभिन्न धान खरीदी समितियों में संगठित तरीके से गड़बड़ियां की गई हैं। उन्होंने बताया कि संभर समिति में 2430 क्विंटल धान की कथित गड़बड़ी की शिकायत पहले भी कलेक्टर से की गई थी, लेकिन कार्रवाई के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया गया।

कांग्रेस नेता ने बाघामुड़ा सेवा सहकारी समिति का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि 10 लाख 70 हजार रुपये के कथित गबन के आरोपी को नियमों के विपरीत प्रबंधक नियुक्त किया गया। उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त कलेक्टर की जांच में 3200 कट्टे धान की कमी और करीब 1200 क्विंटल धान की फर्जी खरीदी सामने आई, लेकिन मुख्य आरोपी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अंकित बागबाहरा ने हेमाली समिति में प्रासंगिक व्यय के भुगतान, फर्जी ट्रक लोडिंग, सीसीटीवी बंद कर धान परिवहन दिखाने तथा खाद वितरण में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए। उनका कहना है कि भौतिक सत्यापन के दौरान यूरिया, डीएपी, पोटाश और एनपीके खाद का बड़ा स्टॉक कम पाया गया, लेकिन संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रही।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि धान शॉर्टेज के नाम पर पूरे मामले की लीपापोती की जा रही है, जिससे शासन को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। पार्टी ने मांग की है कि नई धान खरीदी शुरू होने से पहले सभी समितियों की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों, प्राधिकृत अध्यक्षों और संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।



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