पहली ही बारिश में डूबा रायपुर, कांग्रेस ने भाजपा सरकार और नगर निगम पर साधा निशाना
रायपुर : राजधानी रायपुर में मानसून की पहली तेज़ बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे लोगों के घरों में पानी घुस गया। बारिश के कारण अनाज, राशन, कपड़े, बिस्तर, घरेलू सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं को नुकसान पहुंचा है। प्रभावित परिवारों को आर्थिक नुकसान के साथ भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार और रायपुर नगर निगम पर निशाना साधा है। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने शनिवार सुबह गुड़ियारी, रामनगर, कुशालपुर, पुरानी बस्ती, कोटा, प्रोफेसर कॉलोनी, देवेंद्र नगर, बजरंग नगर, जोरापारा, टिकरापारा, अर्जुन नगर, पारस नगर, मंडी और नहरपारा सहित कई जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगों से मुलाकात की।
विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि पहली ही बारिश में राजधानी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने कहा कि नगर निगम में महापौर, प्रदेश सरकार और सांसद सभी भाजपा के हैं, लेकिन जलभराव से प्रभावित लोगों की सुध लेने कोई जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए तत्काल जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने, राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जब पहली ही बारिश में रायपुर का यह हाल है, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। उनके अनुसार बिजली कटौती और जलभराव से आम नागरिकों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
वहीं, रायपुर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी बारिश के बीच पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड, सिविल लाइन वार्ड, गुरु गोविंद सिंह वार्ड और शंकर नगर वार्ड का दौरा किया। उन्होंने दावा किया कि लगातार बारिश के कारण शहर के अधिकांश वार्डों में जलभराव की समस्या सामने आई है और कई घरों में पानी घुस गया है।
आकाश तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने बारिश से पहले ही नगर निगम प्रशासन को जलभराव की आशंका को लेकर आगाह किया था, लेकिन समय रहते आवश्यक तैयारियां नहीं की गईं। उन्होंने कहा कि पहली ही बारिश ने नगर निगम और महापौर के जल निकासी संबंधी दावों की पोल खोल दी है।
फिलहाल राजधानी में जलभराव को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अब लोगों की निगाह प्रशासन की राहत व्यवस्था और जल निकासी की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हुई है।