अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में डॉ अनुसुइया मुख्य वक्ता, भारत की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान प्रणाली सतत भारत के निर्माण में सहायक: डॉ अनुसुइया
विगत दिनों महिला महाविद्यालय, गोड्डा के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में फोरम फॉर इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च मेथड्स (FIRM) के 7वें वार्षिक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। "पारंपरिक ज्ञान प्रणाली एवं सतत विकास लक्ष्य (Traditional Knowledge System and Sustainable Development Goals)" विषयक इस सम्मेलन का आयोजन के.डी.एस. कॉलेज, गोगरी (मुंगेर विश्वविद्यालय, मुंगेर) के अर्थशास्त्र विभाग तथा इथियोपिया के वेराबे विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सहयोग से किया गया।
सम्मेलन का शुभारंभ आयोजन समिति की अध्यक्ष डॉ. सुमनलता के स्वागत भाषण से से हुआ। आयोजन के मुख्य अतिथि प्रो पूर्व कुलपफारूक अली जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से प्राप्त होने वाले ज्ञान और अनुभव शोध छात्र - छात्राओं के साथ-साथ शिक्षकों को भी काम आएगा। इस अवसर पर तीन शोध पत्रिकाओं एवं सम्मेलन स्मारिका का भी लोकार्पण किया गया।
मुख्य सत्रों में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन, जैव विविधता, शिक्षा, साहित्य, विज्ञान तथा सतत विकास जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास एवं सामाजिक समावेशन जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान का प्रभावी माध्यम है।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में देश - विदेश के विभिन्न राज्यों एवं विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों और शिक्षकों ने ऑफलाइन एवं ऑनलाइन माध्यम से अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। शोधपत्रों में पारंपरिक कृषि, महिला सशक्तिकरण, लोक साहित्य, जनजातीय संस्कृति, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सतत विकास जैसे विविध विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने युवा शोधकर्ताओं को मौलिक एवं समाजोपयोगी अनुसंधान के लिए प्रेरित किया।
सम्मेलन के दूसरे दिन ऑनलाइन सत्र की मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि प्रो (डॉ) अनुसुइया अग्रवाल डी लिट् प्राचार्य स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय महासमुंद थी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के संयुक्त तत्वाधान में "पारंपरिक ज्ञान प्रणाली एवं सतत विकास के लक्ष्य" विषयक अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन आभासी एवं प्रत्यक्ष रूप में आयोजित की जा रही है जो अत्यंत सराहनीय एवं अनुकरणीय हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली इस पारंपरिक ज्ञान प्रणाली पर ही केंद्रित है।
इससे विद्यार्थी न केवल अपनी जड़ से जुड़ सकेंगे अपितु सतत विकास की ओर अग्रसर होते हुए अपने देश को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने में अपना उल्लेखनीय योगदान दर्ज कर पाएंगे। यही नहीं बल्कि इस तरह की संगोष्ठी आयोजन के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग निसंदेह निरंतर अपने विद्यार्थियों को जागरूक और पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने में भी सफलता प्राप्त कर सकेगी। उन्होंने संगोष्ठी की सफलता के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की। इस दिवस लगभग 50 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
सम्मेलन के अंतिम सत्र, समापन समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के उद्योग, श्रम, नियोजन एवं कौशल विकास मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी।
सम्मेलन संयोजक डॉ. अनिल ठाकुर ने सम्मेलन प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि दो दिवसीय आयोजन में भारत सहित विदेशों के अनेक शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने सहभागिता कर पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत विकास में उसकी भूमिका पर गंभीर चिंतन किया। उन्होंने आयोजन समिति, संसाधन व्यक्तियों, प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगी संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त किया। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का सफल समापन हुआ।
सम्मेलन के दौरान उत्कृष्ट शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक संध्या में छात्राओं ने लोकगीत, संथाली नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की मनोहारी झांकी प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया।