महर्षि विद्या मंदिर, मचेवा, महासमुंद में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई गई गुरु पूर्णिमा
महर्षि विद्या मंदिर, मचेवा, महासमुंद में आज गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं भारतीय संस्कृति की गरिमामयी परंपरा के अनुरूप हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार गुरु पूजन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। पूजन एवं माल्यार्पण का कार्य सुभाष पाण्डेय एवं संदीप शर्मा द्वारा संपन्न कराया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अरुण प्रधान (प्राचार्य, डी.आई.ई.टी.), विशिष्ट अतिथि नंद कुमार सिन्हा (उप संचालक, जिला शिक्षा कार्यालय), रामजी प्रसाद तिवारी (सेवानिवृत्त प्रधान पाठक) तथा विद्यालय के प्राचार्य आर.के. तिवारी उपस्थित रहे।
अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। अरुण प्रधान का स्वागत प्राचार्य आर.के. तिवारी द्वारा, नंद कुमार सिन्हा का स्वागत सुभाष पाण्डेय द्वारा, रामजी प्रसाद तिवारी का स्वागत संदीप शर्मा द्वारा तथा विद्यालय के प्राचार्य आर.के. तिवारी का स्वागत दुर्गेश कन्नौजे द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन लिशी देवांगन एवं राखी यादव द्वारा किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय के प्राचार्य आर.के. तिवारी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ही जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए गुरुजनों के प्रति सदैव श्रद्धा, सम्मान एवं समर्पण का भाव बनाए रखने का संदेश दिया।
इसके पश्चात अरुण प्रधान (प्राचार्य, डी.आई.ई.टी.) ने अपने संबोधन में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता बताते हुए विद्यार्थियों को अपने गुरुजनों का सम्मान करने, उनके आदर्शों का अनुसरण करने तथा ज्ञान के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अपने उद्बोधन में नंद कुमार सिन्हा ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार एवं चरित्र का भी निर्माण करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
अंत में रामजी प्रसाद तिवारी ने गुरु शब्द का वास्तविक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं तथा जीवन को सही दिशा एवं उद्देश्य प्रदान करते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा गुरु महिमा पर आधारित मनमोहक नृत्य, प्रेरणादायी नाटक, ओजस्वी भाषण एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। विद्यार्थियों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों एवं शिक्षकगण का मन मोह लिया। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, प्रतिभा एवं प्रस्तुति की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
कार्यक्रम के अंत में अर्चना गोटमारे द्वारा सभी अतिथियों, प्राचार्य, शिक्षकगण, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम विद्यालय के प्राचार्य आर.के. तिवारी के कुशल मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, शिक्षकगण, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही तथा संपूर्ण विद्यालय परिसर गुरु-भक्ति, भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक वातावरण से ओत-प्रोत रहा।
भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर
अन्य सम्बंधित खबरें