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गुरु पूर्णिमा पर विशेष हेल्थ न्यूज़: 'स्कूल और कॉलेज छात्रों के मानसिक तनाव को दूर करने में सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं गुरु'

आज देश भर में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस वर्ष मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Mental Health Experts) ने विशेष रूप से स्कूल और कॉलेज के छात्रों (Students) के बढ़ते मानसिक तनाव पर चिंता व्यक्त की है। मनोचिकित्सकों का मानना है कि आधुनिक समय में शैक्षणिक दबाव (Academic Pressure), सोशल मीडिया की लत और करियर की अनिश्चितता के कारण युवा सबसे ज्यादा डिप्रेशन और एंग्जायटी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में एक शिक्षक या गुरु केवल किताबी ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि छात्रों की मेंटल हेल्थ का रक्षक बन सकता है।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में गुरु की भूमिका मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता एवं मनोवैज्ञानिक के अनुसार, स्कूल और कॉलेज के छात्र अपने जीवन के सबसे संवेदनशील दौर से गुजरते हैं। इस उम्र में एक सच्चा मार्गदर्शक उनके मानसिक स्वास्थ्य को निम्नलिखित तरीकों से संभाल सकता है:अकादमिक दबाव से राहत (Handling Academic Stress): अच्छे नंबर लाने और परीक्षाओं का डर छात्रों के मन में भारी तनाव पैदा करता है। 

गुरु छात्रों को यह सिखाते हैं कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि सीखने का एक हिस्सा है।सोशल मीडिया और पीयर प्रेशर से बचाव (Fighting Peer Pressure): आज के युवा सोशल मीडिया पर दूसरों की नकली जिंदगी देखकर हीन भावना (Inferiority Complex) का शिकार हो जाते हैं। शिक्षक उन्हें अपनी वास्तविक क्षमताओं को पहचानने और खुद पर भरोसा करने की सीख देते हैं।सुरक्षित और जजमेंट-फ्री माहौल (Safe Space in Campus): अक्सर छात्र अपने मन की बात या डिप्रेशन के लक्षण माता-पिता से छुपाते हैं। 

यदि स्कूल या कॉलेज में शिक्षक और छात्र का रिश्ता मित्रवत हो, तो छात्र बिना किसी डर के अपनी मानसिक परेशानी साझा कर सकते हैं।करियर की सही दिशा (Career Clarity): भविष्य को लेकर होने वाली घबराहट और उलझन को दूर करने में गुरु का अनुभव सबसे सटीक रास्ता दिखाता है, जिससे छात्रों का मानसिक बोझ आधा हो जाता है।छात्रों के लिए: गुरु पूर्णिमा पर मानसिक शांति के 3 उपायहेल्थ एक्सपर्ट्स ने आज के दिन छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनने के लिए कुछ खास टिप्स दिए हैं:शिक्षकों से संवाद बढ़ाएं (Communicate Freely): यदि आप किसी विषय, परीक्षा या व्यक्तिगत जीवन के कारण तनाव में हैं, तो अकेले न जूझें। 

अपने पसंदीदा शिक्षक या कॉलेज काउंसलर से बात करें।तुलना करना बंद करें (Stop Comparison): गुरु की सबसे बड़ी सीख यही होती है कि हर बच्चा अद्वितीय (Unique) है। सोशल मीडिया पर दूसरों से अपनी तुलना कर अपने मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान न पहुंचाएं।थैंक्यू नोट लिखें (Express Gratitude): आज अपने किसी ऐसे शिक्षक को धन्यवाद का संदेश भेजें या पत्र लिखें जिन्होंने आपके कठिन समय में आपकी हिम्मत बढ़ाई हो। 

इससे आपके और उनके, दोनों के मन को असीम शांति मिलेगी।निष्कर्ष:स्कूल और कॉलेज केवल डिग्री हासिल करने की जगह नहीं हैं, बल्कि यह मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनने का आधार हैं। इस गुरु पूर्णिमा पर सभी छात्र अपने गुरुओं के मार्गदर्शन में एक तनावमुक्त और स्वस्थ जीवन जीने का संकल्प लें। मेडिकल कॉलेज संबद्ध डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल महासमुंद,मनोरोग कार्यकर्ता  राम गोपाल खूंटे।

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