सरायपाली : एनसीआईएसएम ने पंजीकृत चिकित्सकों की विधिक मान्यता पर जारी किया परिपत्र
भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग अधिनियम, 2020 के तहत पंजीकृत चिकित्सकों की विधिक स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS), बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (BUMS), बैचलर ऑफ सिद्ध मेडिसिन एंड सर्जरी (BSMS) तथा बैचलर ऑफ सोवा-रिग्पा मेडिसिन एंड सर्जरी (BSRMS) जैसी मान्यता प्राप्त डिग्रियां हासिल कर संबंधित राज्य परिषदों में विधिवत पंजीकृत चिकित्सक कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा व्यवसायी हैं।
परिपत्र में कहा गया है कि कुछ सार्वजनिक मंचों, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा सोशल मीडिया पर इन पंजीकृत चिकित्सकों के लिए "झोलाछाप" अथवा "फर्जी डॉक्टर" जैसे अपमानजनक शब्दों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1970 तथा एनसीआईएसएम अधिनियम, 2020 के प्रावधानों के तहत पंजीकृत चिकित्सकों को चिकित्सा व्यवसाय करने की विधिक मान्यता प्राप्त है। साथ ही, वे कानून के तहत निर्धारित अधिकारों एवं दायित्वों के अनुरूप चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के अधिकारी हैं।
परिपत्र में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति, संस्था, मीडिया संगठन अथवा प्राधिकरण द्वारा विधिवत पंजीकृत चिकित्सकों को "झोलाछाप" या "फर्जी डॉक्टर" कहना एनसीआईएसएम अधिनियम, 2020 की भावना के विपरीत है तथा इससे संबंधित चिकित्सकों के व्यावसायिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।
आयोग ने सभी नागरिकों, संस्थाओं और मीडिया से अपील की है कि भारतीय चिकित्सा पद्धति के विधिवत पंजीकृत चिकित्सकों के लिए सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें तथा उनकी कानूनी मान्यता और पेशेवर गरिमा का सम्मान सुनिश्चित करें।