महासमुंद : कृषि विज्ञान केन्द्र में हर्षोल्लास से मनाया गया हरेली तिहार, प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर हुई कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा
कृषि विज्ञान केन्द्र, महासमुंद में छत्तीसगढ़ के प्रमुख पारंपरिक पर्व हरेली तिहार का आयोजन हर्षोल्लास एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ताराचंद बेलची, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस एवं ग्राम पंचायत भलेसर नयापारा के सरपंच सेवाराम कुरें ने बैलों, हलों तथा कृषि यंत्रों एवं उपकरणों की पूजा-अर्चना कर अच्छी फसल एवं किसानों की समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर श्री ताराचंद बेलची ने हरेली पर्व की कृषि एवं पर्यावरणीय प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ा पर्व है। यह किसानों, गौवंश, कृषि उपकरणों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने प्राकृतिक खेती के माध्यम से लौकी, ककड़ी एवं करेला जैसी सब्जियों का बेहतर उत्पादन लेने तथा दीमक के घर की मिट्टी से फास्फोरस एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. गजेन्द्र चन्द्राकर ने कीट प्रबंधन एवं पौध संरक्षण की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। वहीं डॉ. सुनील अग्रवाल, प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर एवं डॉ. गजेन्द्र चन्द्राकर, प्रधान वैज्ञानिक, कृषि कीट विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर की उपस्थिति में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को लेकर कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित की गई।
वैज्ञानिकों ने घनजीवामृत, जीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी अर्क, नीमास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र आदि के उपयोग से फसलों और मृदा स्वास्थ्य को होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रगतिशील कृषक यादराम साहू, बागबाहरा ने बताया कि वे सुगंधित धान की जैविक खेती कर अच्छा लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे मृदा स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है। ग्राम धनसुली के कृषक सोहन पटेल सहित अन्य प्रगतिशील किसानों ने भी परिचर्चा में भाग लिया।
इसके बाद कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रक्षेत्र का भ्रमण कर विभिन्न इकाइयों का अवलोकन किया गया। किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों को व्यवहारिक रूप से समझाने के उद्देश्य से प्रक्षेत्र में एक ब्लॉक का चयन कर प्राकृतिक खेती की प्रदर्शन इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इससे जिले के किसान प्राकृतिक खेती की तकनीकों को समझकर उन्हें अपनाने और लाभ प्राप्त करने के लिए प्रेरित होंगे। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.एल. शर्मा, विषय वस्तु विशेषज्ञ उद्यानिकी डॉ. साकेत दुबे, विषय वस्तु विशेषज्ञ मृदा विज्ञान डॉ. कुणाल चन्द्राकर, विषय वस्तु विशेषज्ञ कृषि एवं जल अभियांत्रिकी डॉ. रवीश केशरी तथा प्रक्षेत्र प्रबंधक श्री कमलकांत लोधी उपस्थित रहे।
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