महासमुंद : जंगल बचा, तो जीवन संवरा : सामुदायिक वन अधिकार से ग्रामीणों को मिली संरक्षण और सुरक्षित भविष्य
जंगल वनवासी और ग्रामीण समुदायों के जीवन, संस्कृति, परंपरा और आजीविका का आधार है। जब जंगल सुरक्षित रहता है, तो उससे जुड़ी जिंदगी भी सुरक्षित रहती है। इसी सोच को धरातल पर साकार करते हुए महासमुंद जिले में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार ने ग्रामीणों को जंगल के संरक्षण और आजीविका संवर्धन से जोड़ने की नई राह दिखाई है। यहां जंगल बचाने की जिम्मेदारी अब केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि ग्रामसभाओं की सामूहिक भागीदारी से जन-अभियान का रूप ले रही है।
महासमुंद जिले में अब तक 73 ग्रामसभाओं को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया गया है। यह अधिकार ग्रामीणों के लिए पीढ़ियों से जंगलों की रक्षा और उनके सतत उपयोग में योगदान देने वाले समुदायों के अधिकारों की महत्वपूर्ण मान्यता है। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मिलने से ग्रामसभाएं वन संरक्षण, प्रबंधन और आजीविका से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
इसी कड़ी में जिले की चार चयनित ग्रामसभाओं बकमा, भालुकोना, द्वारतरा कला एवं द्वारतरा खुर्द में विशेष योजना संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामसभा को 50 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई है। इस राशि से वन संरक्षण और आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। इन ग्रामसभाओं में फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण, मृदा संरक्षण, जैव-विविधता का संरक्षण, जंगलों को आग से बचाने तथा अन्य पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन प्रयासों से जंगलों का संरक्षण के साथ आने वाले समय में ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना भी है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी है। बुजुर्गों का अनुभव, महिलाओं की सक्रिय सहभागिता और युवाओं का श्रम मिलकर सामुदायिक वन प्रबंधन को मजबूत आधार दे रहा है। ग्रामीणों में पौधरोपण और वन संरक्षण को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। ग्राम बकमा के ग्रामीण श्री सुनील कुमार साहू कहते हैं कि पहले हम जंगल से लेते थे, अब हम जंगल को दे रहे हैं। यह जंगल हमारा है और हम इसके रखवाले हैं।
वर्तमान में चारों ग्रामों में ग्रामसभा की अगुवाई में फलदार पौधों का रोपण किया जा रहा है। आज लगाए जा रहे ये पौधे आने वाले वर्षों में आंवला, आम, जामुन, मुनगा सहित विभिन्न उपयोगी फल एवं उत्पाद प्रदान करेंगे। इससे जहां ग्रामीणों के पोषण में सुधार होगा, वहीं अतिरिक्त उपज के माध्यम से बाजार से आय अर्जित करने के अवसर भी बढ़ेंगे। औषधीय पौधों का रोपण स्थानीय स्तर पर वन औषधियों की उपलब्धता और भविष्य में आजीविका के नए साधनों की संभावनाओं को मजबूत करेगा। मृदा संरक्षण के कार्यों से भूमि की गुणवत्ता एवं उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इस प्रकार योजना पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ आगे बढ़ा रही है।