बसना की सुनीता ने बिहान योजना से शुरू किया मशरूम उत्पादन, 2 लाख के पार पहुंची सालाना कमाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा सेवा, सुशासन और आत्मनिर्भरता के संकल्प को निरंतर आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है। इसी सेवा-संकल्प को गांवों तक पहुंचाने वाली योजनाएं आज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम गढ़पटनी की जय मां सम्लेश्वरी महिला स्व सहायता समूह की सदस्य सुनीता निषाद की सफलता इसी बदलाव की कहानी है। कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित सुनीता आज बिहान योजना से जुड़कर मशरूम उत्पादन के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं।
बसना विकासखण्ड के ग्राम पंचायत गढ़पटनी में 1 अक्टूबर 2022 को जय मां सम्लेश्वरी महिला स्व सहायता समूह का गठन किया गया। समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं, जो सभी गरीबी रेखा से संबंधित परिवारों से आती हैं। समूह गठन से पहले ये महिलाएं मुख्यतः गृहणी के रूप में परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही थीं।
महिलाओं को जब यह समझ आया कि सामूहिक प्रयास के माध्यम से वे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, तो उन्होंने एकजुट होकर स्व सहायता समूह बनाने का निर्णय लिया। इसी संकल्प के साथ जय मां सम्लेश्वरी महिला स्व सहायता समूह का गठन हुआ और महिलाओं की सफलता की विकास यात्रा शुरू हुई।
समूह गठन के बाद सदस्य सुनीता निषाद ने व्यक्तिगत आजीविका गतिविधि के रूप में मशरूम उत्पादन शुरू करने का निर्णय लिया। उनके घर में मशरूम उत्पादन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध था, लेकिन व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी की कमी एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में बिहान योजना के माध्यम से स्व सहायता समूह से जुड़ना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया। समूह को प्राप्त आरएफ राशि, सीआईएफ राशि एवं बैंक लिंकेज के माध्यम से सुनीता ने मशरूम उत्पादन की गतिविधि प्रारंभ की।
धीरे-धीरे उन्होंने इस कार्य को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया और मशरूम उत्पादन को अपनी आय का जरिया बना लिया। समूह एवं ग्राम संगठन से प्राप्त सहयोग का उपयोग करते हुए उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और निर्धारित राशि को समय पूर्व ब्याज सहित वापस भी किया।
सुनीता निषाद बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपए से कम थी। स्व सहायता समूह से जुड़ने और मशरूम उत्पादन की गतिविधि प्रारंभ करने के बाद उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 2 लाख 4 हजार रुपये हो गई। बढ़ी हुई आय से परिवार के पालन-पोषण, स्वास्थ्य, बच्चों की उच्च शिक्षा तथा जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद मिली है।