महासमुंद और पिथौरा में ‘रिफॉर्म उत्सव’ के जरिए जल व मिट्टी संरक्षण की पहल, 26 ग्राम पंचायतों में दिखेगा वाटरशेड विकास का असर
भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त प्रयास से वाटरशेड विकास में किए गए सुधारों को ग्रामीण समुदायों तक पहुँचाने ‘रिफॉर्म उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। इसके माध्यम से वाटरशेड विकास से जुड़े सुधारों की जानकारी आम नागरिकों तक पहुँचाने के साथ-साथ जागरूकता, जनभागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देना है। इसे जन योजना अभियान ‘सबकी योजना, सबका विकास’ के साथ एकीकृत किया जा रहा है। अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 से ग्राम सभाओं के माध्यम से होगी।
उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि जिले में रिफॉर्म उत्सव के अंतर्गत विकासखंड महासमुंद एवं पिथौरा की वाटरशेड विकास परियोजनाओं से जुड़ी लगभग 26 ग्राम पंचायतों में वाटरशेड विकास से संबंधित सुधारों, उपलब्ध सुविधाओं एवं इसके लाभों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुँचाई जाएगी।
इसके पश्चात राज्य, जिला एवं परियोजना स्तर पर भी रिफॉर्म उत्सव की विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मिट्टी को बचाना है, तो पानी को सहेजना जरूरी है इसी सोच के साथ वाटरशेड विकास का प्रमुख उद्देश्य मिट्टी एवं जल का संरक्षण करते हुए जल-सुरक्षित गांव, मजबूत कृषि व्यवस्था और समृद्ध किसान तैयार करना है। सूखा प्रभावित एवं वर्षा आधारित क्षेत्रों में वाटरशेड विकास से जल की उपलब्धता और मृदा नमी में सुधार होने के परिणामस्वरूप कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।
जिन क्षेत्रों में पहले किसान एक फसल भी नहीं ले पाते थे, वहां अब एक फसल तथा जहां पहले एक फसल होती थी, वहां दो या उससे अधिक फसलें लेने की संभावनाएं बढ़ी हैं। इससे कृषि उत्पादन, किसानों की आय तथा ग्रामीण आजीविका के अवसरों में वृद्धि हो रही है।
वाटरशेड परियोजना क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण बीज, उन्नत कृषि उपकरण, फसल विविधीकरण, बागवानी, कृषि वानिकी तथा स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न उत्पादन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जल उपलब्धता, मृदा नमी और क्षरित भूमि के पुनरुद्धार से कृषि उत्पादकता में सुधार के साथ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। पर्वतीय एवं पहाड़ी क्षेत्रों में झरना क्षेत्र विकास के माध्यम से जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में झरनों के जल प्रवाह में तीन गुना तक वृद्धि तथा जल उपलब्धता की अवधि में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे ग्रामीण समुदायों, विशेषकर महिलाओं के जल संग्रहण से जुड़े श्रमभार में कमी के साथ जल सुरक्षा एवं आजीविका के अवसरों में सुधार हुआ है। वाटरशेड विकास में समुदाय की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए देशव्यापी श्वाटरशेड यात्रा’ एवं ‘वाटरशेड महोत्सव’ आयोजित की गई हैं। इन प्रयासों से जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक रखरखाव में भी ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा मिला है।
कृषि विभाग द्वारा जिला एवं परियोजना स्तर पर कार्यरत मैदानी अमले को सक्रिय करते हुए रिफॉर्म उत्सव में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है। जिससे वाटरशेड विकास से जुड़े सुधार केवल दस्तावेजों एवं योजनाओं तक सीमित न रहकर फाइल से लाइफ तक पहुंचकर ग्रामीण परिवारों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव लाएं।