अरपा नदी में प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, 70 नालों का पानी सिर्फ 4 एसटीपी से कैसे साफ होगा? अगली सुनवाई से पहले देना होगा पूरा जवाब
बिलासपुर: अरपा नदी में बढ़ते प्रदूषण और शहर की सीवरेज व्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नगर निगम और शासन से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि नगर निगम क्षेत्र से निकलने वाले करीब 70 नालों के सीवरेज को क्या मौजूदा एसटीपी के जरिए पूरी तरह ट्रीट किया जा रहा है। डिवीजन बेंच ने शासन को इस संबंध में नया शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने पूछा, 4 एसटीपी से 70 नालों का पानी कैसे होगा साफ
चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान सीवरेज प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए। कोर्ट ने विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या शहर के करीब 70 नालों से निकलने वाले गंदे पानी को केवल चार एसटीपी के जरिए पूरी तरह ट्रीट किया जा सकता है।कोर्ट ने शासन से यह भी बताने को कहा है कि यदि मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है तो अतिरिक्त एसटीपी की जरूरत कितनी है और उन्हें कहां बनाया जाना प्रस्तावित है।
शासन ने बताया, दो नए एसटीपी का काम चल रहा
मुख्य सचिव विकासशील की ओर से हाईकोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि शहर में फिलहाल चार एसटीपी हैं और दो अन्य प्लांट निर्माणाधीन हैं। शासन के अनुसार सभी एसटीपी के पूरा होने के बाद वास्तविक सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता की समीक्षा की जाएगी। इसके आधार पर आगे अतिरिक्त प्लांट की जरूरत तय की जाएगी।हाईकोर्ट ने शासन के इस जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को निर्धारित की है।
बिलासपुर में रोज निकल रहा 72.20 एमएलडी सीवरेज
शासन के शपथ पत्र के मुताबिक बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की आबादी करीब 6 लाख 68 हजार 540 है। शहर से प्रतिदिन लगभग 72.20 एमएलडी सीवरेज निकलता है। इस गंदे पानी को सीवरेज नेटवर्क और करीब 70 नालों के जरिए अलग-अलग स्थानों से चैनलाइज किया जाता है।यही सीवरेज अरपा नदी के प्रदूषण को लेकर सबसे बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। ऐसे में कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नदी में पहुंचने से पहले सभी नालों के पानी का उचित ट्रीटमेंट हो।
मौजूदा एसटीपी की क्षमता 78 एमएलडी, इस्तेमाल हो रहा सिर्फ 43.90 एमएलडी
प्रशासन के अनुसार शहर में इस समय चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं। इनकी कुल क्षमता 78 एमएलडी बताई गई है, लेकिन फिलहाल करीब 43.90 एमएलडी क्षमता का ही इस्तेमाल हो रहा है।इसके अलावा 16 एमएलडी क्षमता वाले दो नए एसटीपी बनाए जा रहे हैं। इनमें से एक प्लांट ट्रायल रन के चरण में पहुंच चुका है, जबकि दूसरे के 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना जताई गई है।दोनों नए प्लांट शुरू होने के बाद शहर की कुल सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता 94 एमएलडी हो जाएगी। यह क्षमता मौजूदा अनुमानित 72.20 एमएलडी प्रतिदिन सीवरेज उत्पादन से अधिक होगी।
क्षमता से ज्यादा जरूरी है हर नाले का एसटीपी तक पहुंचना
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक अहम सवाल उठाया कि एसटीपी की कुल क्षमता पर्याप्त होने के बावजूद क्या शहर के सभी नालों का गंदा पानी वास्तव में इन प्लांट तक पहुंच रहा है।कोर्ट ने शासन को अब यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि नगर निगम क्षेत्र के सभी 70 नाले मौजूदा चार और निर्माणाधीन दो एसटीपी समेत कुल छह प्लांट से कनेक्टेड हैं या नहीं।
हर नाले के पानी को इंटरसेप्ट और ट्रीट करने की व्यवस्था बतानी होगी
अगले शपथ पत्र में प्रशासन को यह भी बताना होगा कि प्रत्येक नाले से निकलने वाले सीवरेज को किस तरह इंटरसेप्ट किया जा रहा है और उसे एसटीपी तक डायवर्ट करने की व्यवस्था क्या है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि अरपा नदी में पानी छोड़े जाने से पहले उसका पूरा ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने के लिए कौन से कदम उठाए जा रहे हैं।यदि अतिरिक्त एसटीपी की जरूरत सामने आती है तो शासन को उनकी प्रस्तावित क्षमता, स्थान और निर्माण की समय-सीमा की जानकारी भी कोर्ट के सामने रखनी होगी।
17 नवंबर को फिर होगी सुनवाई, अरपा नदी की सेहत पर टिकी नजर
अरपा नदी के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े इस मामले में अब अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होगी। तब शासन के नए शपथ पत्र से यह तस्वीर साफ होगी कि बिलासपुर के सभी 70 नालों का सीवरेज प्रभावी तरीके से एसटीपी तक पहुंच रहा है या नहीं और मौजूदा व्यवस्था नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए पर्याप्त है या नहीं।