RTE सीटों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट नाराज, 18 नवंबर तक सही डेटा नहीं आया तो शिक्षा सचिव पर होगी कार्रवाई
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार अधिनियम यानी RTE के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों और बच्चों से जुड़ा सही रिकॉर्ड पेश नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने शासन को सभी स्कूलों का सत्यापित और पूरा रिकॉर्ड पेश करने का एक और मौका दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि तय समय सीमा में सही जानकारी नहीं दी गई तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
RTE आरक्षित सीटों के आंकड़ों पर उठे गंभीर सवाल
मामला भगवंत की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने अदालत को बताया कि सरकार द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड में कई प्रमुख निजी स्कूलों में RTE के तहत आरक्षित सीटों की संख्या शून्य या बेहद कम दिखाई गई है।
याचिकाकर्ता पक्ष ने इन आंकड़ों की वास्तविकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि शासन की ओर से अदालत में प्रस्तुत जानकारी जमीनी स्थिति से मेल नहीं खाती। इसी को लेकर हाईकोर्ट ने सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर नाराजगी जाहिर की।
हाईकोर्ट ने कहा, अदालत के सामने अधूरा रिकॉर्ड पेश करना स्वीकार नहीं
चीफ जस्टिस के. आर. महापात्रा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की स्पेशल डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकारी रिकॉर्ड पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायालय के समक्ष इस तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
बेंच ने यह भी ध्यान दिलाया कि वर्ष 2016 में दिए गए निर्देशों के बावजूद उनका प्रभावी तरीके से पालन नहीं हुआ है। इससे कोर्ट ने शासन की ओर से मामले को लेकर की जा रही कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।
सभी स्कूलों का सत्यापित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में सभी स्कूलों से संबंधित RTE सीटों और प्रवेश से जुड़ा सही, पूरा और सत्यापित डेटा पेश किया जाए। अदालत अब यह देखना चाहती है कि आरक्षित सीटों की वास्तविक संख्या क्या है और इन सीटों पर कितने बच्चों को प्रवेश मिला है।
18 नवंबर की तारीख बेहद अहम, चूके तो शिक्षा सचिव पर कार्रवाई
अदालत ने राज्य शासन को रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए 18 नवंबर तक का समय दिया है। हाईकोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि अगर इस तारीख तक सभी स्कूलों का सही डेटा अदालत के सामने पेश नहीं किया गया, तो शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह के खिलाफ धारा 311 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस आदेश के बाद अब शिक्षा विभाग के सामने सभी स्कूलों का रिकॉर्ड दोबारा जांचकर उसे पूरी तरह सत्यापित रूप में अदालत के सामने रखने की चुनौती है। RTE के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित सीटों से जुड़ा यह मामला अब हाईकोर्ट की सख्त निगरानी में पहुंच गया है।