बसना : मुख्यमंत्री अंकल-विधायक अंकल, स्कूल जाने के लिए गिधली-खरोरा मार्ग को मई तक पक्की सड़क बनवा दीजिए
दो किलोमीटर दूर स्कूल के लिए 15 किलोमीटर का चक्कर, बरसात में 50-60 बच्चों को वेन से जाना पड़ा
हर बच्चे पर 1350 रुपए मासिक किराया, चार माह में करीब 2.70 लाख रुपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ
“मुख्यमंत्री अंकल विष्णु देव साय जी, विधायक अंकल डॉ. सम्पत अग्रवाल जी, आप दोनों से विनम्र निवेदन है कि गिधली-खरोरा सड़क का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराकर मई तक पूरा करवा दीजिए। ताकि शिक्षा सत्र 2027-28 में हमें फिर कीचड़ से सराबोर सड़क पर परेशान होकर स्कूल नहीं जाना पड़े। हमें दो किलोमीटर दूर स्कूल जाने के लिए 15 किलोमीटर घूमकर नहीं जाना पड़े और बरसात में वेन का किराया भी नहीं देना पड़े।”
खरोरा और बरिहापाली के स्कूली बच्चों की यह अपील केवल सड़क की मांग नहीं, बल्कि रोजमर्रा की उस परेशानी की तस्वीर है, जिसका सामना वे वर्षों से कर रहे हैं। खरोरा से गिधली की दूरी महज दो किलोमीटर है, लेकिन बरसात में कच्चा मार्ग कीचड़ से सराबोर होने के कारण यही दूरी 15 किलोमीटर के चक्कर में बदल जाती है। बारिश अब थम चुकी है और रास्ता धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, लेकिन बच्चों के सामने अगली बरसात की चिंता अभी से खड़ी है।
खरोरा और बरिहापाली के करीब 50 से 60 विद्यार्थी गिधली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन करते हैं। सामान्य दिनों में बच्चे पैदल या साइकिल से दो किलोमीटर का रास्ता तय कर स्कूल पहुंचते हैं। लेकिन बारिश के दौरान सड़क की स्थिति ऐसी हो जाती है कि स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में बच्चों के लिए वेन की व्यवस्था करनी पड़ती है। वेन को गुढियारी, भूकेल, फोरलेन, सिंघनपुर और मोहका होते हुए करीब 15 किलोमीटर घूमकर गिधली पहुंचना पड़ता है। इस अतिरिक्त दूरी की कीमत भी बच्चों के परिवारों को चुकानी पड़ती है।
प्रत्येक छात्र को प्रतिमाह 1350 रुपए वेन किराया देना पड़ा। करीब 50 बच्चों के हिसाब से एक महीने में 67 हजार 500 रुपए और चार माह में करीब 2 लाख 70 हजार रुपए का अतिरिक्त खर्च बैठता है। मध्यमवर्गीय परिवार किसी तरह यह खर्च उठा लेते हैं, लेकिन गरीब परिवारों के बच्चों के लिए यह रकम भारी आर्थिक बोझ बन जाती है। करीब 10 से 15 बच्चे ऐसे भी हैं, जो वेन का किराया वहन नहीं कर पाने के कारण कीचड़ भरे रास्ते से ही स्कूल आने-जाने को मजबूर होते रहे हैं।
ग्राम गिधली में लगातार 10 वर्षों तक पंच रहे रामेश्वर बारीक ने बताया कि खरोरा और बरिहापाली के बच्चे गिधली में हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई शुरू होने के बाद से यहां आते रहे हैं। स्कूल में अच्छी पढ़ाई होने के कारण विद्यार्थी दूर-दराज के अन्य स्कूलों में जाने के बजाय गिधली में पढ़ना पसंद करते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार खरोरा-गिधली मार्ग को पक्का करने और झरिया नाला के पास पुलिया निर्माण की मांग लंबे समय से की जाती रही है। करीब दो वर्ष पहले झरिया नाला के पास उच्च स्तरीय पुल का निर्माण तो हुआ, लेकिन सड़क पक्की नहीं होने से बरसात में समस्या बरकरार है।
सवाल यह है कि पुल बनने के बाद भी उसके दोनों ओर सड़क कब बनेगी और बच्चों को दो किलोमीटर की राह के लिए 15 किलोमीटर का चक्कर कब तक लगाना पड़ेगा? अब बच्चों की नजर मई तक होने वाले संभावित सड़क निर्माण पर है। उनकी मांग स्पष्ट है—अगली बारिश से पहले सड़क पक्की हो जाए, ताकि शिक्षा की राह में कीचड़, लंबी दूरी और वेन किराया बाधा न बने। बच्चों का कहना है कि उन्हें कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं चाहिए, सिर्फ इतना चाहिए कि उनके स्कूल तक पहुंचने वाली दो किलोमीटर की सड़क बरसात में भी चलने लायक हो।