बसना : 24 को रामचंडी दिवस में शामिल होने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी सहमति
कोलता समाज का गढ़फुलझर में होगा धार्मिक एवं सामाजिक समारोह
छत्तीसगढ़ और ओडिशा से जुटेंगे कोलता समाज के लोग
गढ़ फुलझर में आगामी 24 अक्टूबर को आयोजित होने वाले रामचंडी दिवस समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो सकते हैं। कोलता समाज के प्रतिनिधि मंडल ने बसना विधायक सम्पत अग्रवाल के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें समारोह में शामिल होने का आमंत्रण दिया। समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार मुख्यमंत्री ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में आने की सहमति प्रदान की है।
कोलता समाज के संरक्षक हरिचरण प्रधान ने बताया कि सरायपाली, बसना और पिथौड़ा क्षेत्र में बड़ी संख्या में कोलता समाज के लोग निवास करते हैं। समाज की आराध्य देवी मां रामचंडी प्राचीन फुलझर राज्य के ऐतिहासिक गढ़ के शिखर पर विराजमान हैं।
धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक महत्व रखने वाला यह स्थल फुलझर अंचल की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिवर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को रामचंडी दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है ।
रामचंडी दिवस पर वृहद सामाजिक एवं धार्मिक समारोह आयोजित करने की परंपरा रही है। शारदीय नवरात्रि के पश्चात मां रामचंडी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ओडिशा से भी कोलता समाज के लोग शामिल होते हैं।
यह आयोजन समाज की धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का अवसर भी प्रदान करता है। मां रामचंडी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था केवल कोलता समाज तक सीमित नहीं है। अपनी मनोकामनाएं लेकर दूर-दूर से अन्य समाजों के लोग भी मां के दरबार में पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगते हैं।
इस अवसर पर महाभंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस प्रकार रामचंडी दिवस धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक समरसता और आपसी सद्भाव का संदेश भी देता है। फुलझर अंचल छत्तीसगढ़ी और ओड़िया संस्कृति के संगम के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में यहां की धार्मिक परंपराओं और सामाजिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
रामचंडी दिवस पर दोनों राज्यों से समाज के लोगों का जुटना इस साझा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। कोलता समाज के अध्यक्ष गिरधारी साहू ने बताया कि पिछले वर्ष भी रामचंडी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री के आने का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण वे शामिल नहीं हो सके थे।
इस वर्ष प्रतिनिधि मंडल को मुख्यमंत्री ने समारोह में शामिल होने की सहमति दी है। समाज को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की उपस्थिति से गढ़फुलझर के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को व्यापक पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने पहुंचे प्रतिनिधि मंडल में बाबा बिशासहे कुल कोलता समाज के संभागीय अध्यक्ष गिरधारी साहू, संरक्षक हरिचरण प्रधान एवं व्यासदेव भोई, उपाध्यक्ष चित्रसेन प्रधान, सचिव मोहनलाल साहू, सदस्य सुवर्धन प्रधान, बसना आंचलिक सभा अध्यक्ष भोजराज प्रधान तथा गिधली सभापति संजय भोई शामिल थे।