किसान परिवार के देवव्रत सिन्हा ने चुनी अलग राह, घर में बनाई AI लैब, अब धमतरी के बच्चों को सिखा रहे भविष्य की तकनीक
धमतरी : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड निवासी देवव्रत सिन्हा ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद नौकरी की पारंपरिक राह के बजाय तकनीकी नवाचार को अपना लक्ष्य बनाया। किसान परिवार से आने वाले देवव्रत ने घर पर ही आधुनिक तकनीक सीखी और अपनी मेहनत से आईटी तथा एआई लैब तैयार की। अब वे रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग, ड्रोन और 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीकों से स्कूली बच्चों को परिचित करा रहे है। उनका सपना अपने जिले में हजारों ऐसे युवा तैयार करना है, जो नई तकनीक विकसित करने और अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान दे सकें।
बीटेक के बाद नौकरी के बजाय चुना तकनीकी नवाचार का रास्ता
देवव्रत सिन्हा की इंजीनियरिंग की पढ़ाई कोरोना काल के लॉकडाउन के दौरान हुई। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीकों को खुद समझना शुरू किया। धीरे-धीरे रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वेबसाइट डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई। इसी रुचि को उन्होंने अपने काम का आधार बना लिया।परिवार चाहता था कि देवव्रत सरकारी नौकरी की तैयारी करे, लेकिन उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। उनका मानना है कि सरकारी सेवा के साथ-साथ तकनीकी अनुसंधान और नवाचार भी देश के विकास के लिए जरूरी है।देवव्रत का कहना है कि यदि सभी युवा केवल सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे रहेंगे, तो नई तकनीकों पर काम करने के लिए कौन आगे आएगा। वे चाहते है कि धमतरी जिले से हजारों युवा तकनीकी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएं और उनसे भी बेहतर उपलब्धियां हासिल करें।
STEM रोबो हब इंडिया के जरिए बच्चों को दे रहे तकनीकी शिक्षा
देवव्रत सिन्हा STEM रोबो हब इंडिया के संस्थापक है। इस पहल के माध्यम से वे बच्चों को आधुनिक तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान देने का प्रयास कर रहे है। STEM का अर्थ साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स है।उनका उद्देश्य बच्चों को केवल किताबों में तकनीक के बारे में पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें खुद प्रयोग करने, मॉडल तैयार करने और नए आविष्कारों की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करना है। इसके लिए वे रोबोटिक्स, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और 3D प्रिंटिंग जैसे विषयों पर काम कर रहे है।देवव्रत स्कूलों में जाकर बच्चों को इन तकनीकों की जानकारी देते है। सरकारी स्कूलों में भी वे कई बार प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर चुके है, ताकि आधुनिक तकनीक की शिक्षा केवल सीमित संसाधनों वाले बच्चों के लिए बाधा न बने।
आठवीं-नौवीं कक्षा से ही तकनीक से जुड़ें बच्चे
देवव्रत का मानना है कि बच्चों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने के लिए कॉलेज तक इंतजार नहीं करना चाहिए। वे चाहते है कि विद्यार्थी आठवीं और नौवीं कक्षा से ही रोबोटिक्स, कोडिंग, 3D प्रिंटिंग तथा एआई जैसी तकनीकों को देखना, समझना और उन पर प्रयोग करना शुरू कर दें।उनके अनुसार, यदि बच्चे कम उम्र से ही अनुसंधान और नवाचार की दिशा में काम करने लगें, तो बारहवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते उनके पास मजबूत आधार तैयार हो सकता है। इससे उन्हें आगे की पढ़ाई और तकनीकी करियर चुनने में मदद मिलेगी।देवव्रत का मानना है कि इस पहल का लाभ केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा। जब धमतरी के बच्चे तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे, तो इससे पूरे जिले को नई पहचान मिल सकती है।
तैयार किया AI ब्रेन, डेटा सुरक्षित रखने पर भी किया काम
देवव्रत के तकनीकी प्रयोगों में उनका तैयार किया गया एआई ब्रेन भी शामिल है। उनके मुताबिक, इस सिस्टम को अलग-अलग भाषाओं में बातचीत करने में सक्षम बनाने की दिशा में विकसित किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने इसकी प्रोग्रामिंग और डेटा को सुरक्षित रखने से जुड़े पहलुओं पर भी काम किया है।देवव्रत चाहते है कि सिस्टम में मौजूद जानकारी लंबे समय तक सुरक्षित रहे। यदि डिवाइस खराब हो जाए, तो उसकी कोडिंग के आधार पर सिस्टम को दोबारा तैयार करने और डेटा को फिर से उपलब्ध कराने की संभावना पर भी उन्होंने काम किया है।उनके लिए यह प्रयोग केवल एक तकनीकी मॉडल तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए वे यह दिखाना चाहते है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सीखने की इच्छा और लगातार प्रयोग करने की आदत से नए समाधान विकसित किए जा सकते है।
नौकरी छोड़ने के बाद पिता से नहीं ली आर्थिक मदद
देवव्रत अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी महत्वपूर्ण मानते है। उनका कहना है कि नौकरी छोड़ने के बाद से उन्होंने अपने पिता से एक रुपये की भी आर्थिक सहायता नहीं मांगी। वे अपने प्रयासों के जरिए आगे बढ़ने और अपनी कंपनी को विकसित करने में जुटे है।उनका लक्ष्य भारत को केवल तकनीक का इस्तेमाल करने वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि नई तकनीक विकसित करने और दुनिया को ज्ञान देने वाले देश के रूप में स्थापित होते देखना है। इसी सोच के साथ वे अपनी तकनीकी पहल को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे है।
बचपन से मशीनों को खोलकर समझने की थी आदत
देवव्रत के पिता चमन कुमार सिन्हा और माता बिमला सिन्हा बताते है कि बचपन से ही उनका बेटा मशीनों और तकनीकी उपकरणों में दिलचस्पी रखता था। वह छोटे-छोटे खिलौनों को खोलकर उनके अंदर की बनावट और काम करने के तरीके को समझने की कोशिश करता था।समय के साथ यही जिज्ञासा रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीक पर काम करने की प्रेरणा बन गई। माता-पिता के मुताबिक, देवव्रत पढ़ाई में अच्छा रहा है। उसने किसी बड़े संस्थान में जाकर विशेष प्रशिक्षण लेने के बजाय घर पर रहकर खुद सीखने और प्रयोग करने का रास्ता चुना।देवव्रत अपने काम के बारे में परिवार को जानकारी देते रहते है, हालांकि उनके कई तकनीकी प्रयोगों को समझना माता-पिता के लिए भी आसान नहीं होता। इसके बावजूद उन्हें अपने बेटे की मेहनत और कुछ नया करने की कोशिश पर गर्व है।
धमतरी कलेक्टर ने की सराहना, मगरलोड में रोबोटिक्स लैब की तैयारी
देवव्रत के प्रयासों को जिला प्रशासन का भी समर्थन मिल रहा है। धमतरी के कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने उनके काम की सराहना करते हुए बताया कि किसान परिवार से आने वाले देवव्रत रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और एआई जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहे है।
वे स्कूलों में बच्चों को रोबोटिक्स और 3D प्रिंटिंग की जानकारी देने के साथ सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित कर चुके है। कलेक्टर के मुताबिक, जिला प्रशासन देवव्रत के साथ मिलकर मगरलोड ब्लॉक में रोबोटिक्स लैब शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है।
इस पहल का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों तक उन्नत तकनीक की शिक्षा पहुंचाना और उन्हें नए प्रयोगों के अवसर उपलब्ध कराना है। कलेक्टर ने यह भी कहा कि जिले में प्रतिभाशाली और उत्साही युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास करेगा। देवव्रत जैसे युवाओं की पहल दूसरे विद्यार्थियों को भी प्रेरित कर सकती है।
भगवद्गीता की सीख से मिलती है आगे बढ़ने की प्रेरणा
देवव्रत के कार्यस्थल पर एक पोस्टर लगा है, जिस पर लिखा है, युद्ध करना तुम्हारा परम कर्तव्य है, पार्थ। वे बताते है कि भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को कर्तव्य का बोध कराने वाली सीख उन्हें लगातार काम करने की प्रेरणा देती है।
जब कभी आलस आता है या काम करने की इच्छा कम होती है, तो पोस्टर पर लिखी यह पंक्ति उन्हें अपना लक्ष्य याद दिलाती है। इसके बाद वे फिर से अपने काम में जुट जाते है।
उनके लिए तकनीक सीखना और नए प्रयोग करना केवल करियर बनाने का जरिया नहीं है। यह एक ऐसा लक्ष्य है, जिसे वे लगातार मेहनत करके आगे ले जाना चाहते है।
धमतरी से हजारों तकनीकी प्रतिभाएं तैयार करने का लक्ष्य
देवव्रत सिन्हा की कहानी एक युवा इंजीनियर के व्यक्तिगत प्रयासों से आगे बढ़कर बच्चों को नई संभावनाओं से जोड़ने की पहल भी है। वे चाहते है कि धमतरी का हर बच्चा आधुनिक तकनीक को समझे, सवाल पूछे, खुद प्रयोग करे और नई चीजें बनाने का आत्मविश्वास विकसित करे।
मगरलोड में रोबोटिक्स लैब शुरू करने की दिशा में जिला प्रशासन के प्रयास इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मददगार हो सकते है। यदि स्कूली विद्यार्थियों को शुरुआती उम्र से ही तकनीकी शिक्षा और प्रयोग करने के अवसर मिलते है, तो वे भविष्य में अनुसंधान, इंजीनियरिंग और नवाचार जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की तैयारी कर सकते है।
किसान परिवार से निकलकर अपनी मेहनत से तकनीकी दुनिया में जगह बनाने की कोशिश कर रहे देवव्रत अब अपना ज्ञान अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते है। उनका सपना है कि धमतरी से शुरू होने वाली यह पहल दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचे और भारत नई तकनीक विकसित करने वाले देशों में अपनी मजबूत पहचान बनाए।