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बलौदाबाजार:- माँ वैष्णव देवी मंदिर तालाझर में 9 वां नवरात्री में 171 ज्योत प्रज्लवित।

वर्ष 2015 में त्रिकुट पहाड़ी पर मनोज शर्मा ने अपने पिताजी की स्वस्थ होने पर माँ वैष्णव देवी मंदिर की स्थापना की थी। कोडार खल्लारी मंदिर के पुजारी और मनोज शर्मा के कुलगुरु मोहनदास वैष्णव के हाथों मंदिर की स्थापना की गई थी। वर्ष 2012 में मनोज शर्मा के पिताजी 72 वर्ष की आयु में अचानक सिर दर्द हुआ और कोमा में चले गए, जिसे तत्काल विद्या हॉस्पिटल रायपुर में भर्ती कराया गया, जहा पर डॉक्टर शुभा दुबे ने यह कहा कि उस उम्र में कोमा से वापसी नही हो सकता, इसलिए वापस ले जाओ,अब आपके पास कोई रास्ता नही है, सिर्फ भगवान ही बचा सकता है, तो मोहनदास वैष्णव ने कहा कि माँ ही सब कुछ कर सकती है और आप माँ से दुआ मानो, फिर वैसा ही किया, माँ खल्लारी की दुआ से उनके पिताजी स्वस्थ हो गए । और इसी की याद में माँ वैष्णव देवी मंदिर की स्थापना किया.  

यहाँ पहले वर्ष 51 ज्योत था, शारदीय नवरात्रि में घने जंगलों और नदी नालों के कारण दर्शक कम आते है, फिर भी इस वर्ष 171 ज्योत प्रज्लवित हुआ। यहाँ चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में काफी भीड़ रहती है, यहां शुरू से ही बलिप्रथा नही दिया जाता है। माता सात्विक खीर पूड़ी का प्रसाद चढ़ाया जाता है। पूरे नवदिन का भंडारा रखा जाता है, कहते इस मंदिर में जो भी श्रद्धा से माँ के पास आता है वह खाली नही जाता ।

घने जंगलों और त्रिकुट पहाड़ी में होने के कारण माता का मंदिर बहुत ही अच्छा लगता है। मंदिर के सामने ही नदी का बहना मन को मोह लेता है मंदिर के पूर्व दिशा में एक स्थान से नदी का उद्गम स्थल है, गर्मी में भी पानी अनवरत बहता रहता है जिसे स्वेत गंगा का नाम खल्लारी मंदिर के पुजारी मोहनदास जी ने रखा है। तीनो ओर पहाड़ी से घिरा होने के कारण मानो ऐसा महसूस होता है कि कटरा में जैसे विराजमान माँ वैष्णवी का दूसरा रूप है, जिस स्थान पर आज मंदिर है, ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थान बाघ ने अपने बच्चों को जन्म दिया था, इस स्थान की महिमा है, यहां आसपास जंगली जानवरों का रहवास इलाका है, आज तक यहां कई बार शिकारी आये लेकिन शिकार नही कर पाते। इस जगह माँ की स्थापना होने से यह जगह पर कई चमत्कार देखने को मिला है.




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