महासमुंद जिले के 1.26 लाख से अधिक किसानों के खातों में 25.45 करोड़ रुपये अंतरित
जिले में कार्यक्रम का सीधा प्रसारण कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, महासमुंद और कृषि विज्ञान केंद्र, भलेसर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पीएम किसान उत्सव दिवस के दौरान किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर (जुगनू) चंद्राकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जनपद पंचायत महासमुंद की उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर तथा ग्राम पंचायत भलेसर-नयापारा के पूर्व सरपंच प्रतिनिधि टीकेश्वर सिन्हा, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह सहित जनप्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक एवं आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसान शामिल हुए।
जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर (जुगनू) चंद्राकर ने किसानों को बिजली एवं पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया। जनपद पंचायत महासमुंद की उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर ने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने और रबी मौसम में दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने किसानों को फसल विविधीकरण के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि खरीफ मौसम में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं लघु धान्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रथम वर्ष में 15 हजार रुपये तथा द्वितीय वर्ष में 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने किसानों से जल संरक्षण, खेती की लागत कम करने तथा वैकल्पिक फसलों को अपनाकर कृषि आय बढ़ाने की अपील की।
कलेक्टर ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि अरहर 8,450 रुपये, मूंग 8,780 रुपये, उड़द 8,200 रुपये तथा मूंगफली 7,517 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए निर्धारित केंद्र बनाए गए हैं।
इनमें कृषि उपज मंडी परिसर पिटियाझर, महासमुंद, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति सिर्री-पठारीमुड़ा, बागबाहरा, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पिथौरा, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति भंवरपुर, बसना तथा कृषि उपज मंडी परिसर सरायपाली शामिल हैं।
कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य, फसल अवशेष प्रबंधन, जैविक खाद के उपयोग, दलहन-तिलहन एवं लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देने सहित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा खेती की लागत कम कर उत्पादन एवं आय बढ़ाने के संबंध में प्रशिक्षण दिया। जिले के सभी विकासखंडों में भी पीएम किसान उत्सव दिवस का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, भलेसर के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर.एल. शर्मा, डॉ. साकेत दुबे, डॉ. कुणाल चंद्राकर, डॉ. रविश केशरी, श्री डिप्रोशन, डॉ. शिल्पा लकरा, डॉ. समरथ बघेल, डॉ. पुनिथा कार्तिकेयन एवं प्रक्षेत्र प्रबंधक कमलकांत लोधी सहित कृषि विभाग के उप संचालक श्री एफ.आर. कश्यप उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर निर्यातोन्मुख उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टरों का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में पशुधन नस्ल सुधार एवं अनुसंधान, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, मधुमक्खी पालन तथा आलू प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने जैसी पहलों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का संदेश दिया गया।