सरायपाली : शिक्षक प्रतिभा सम्मान से सम्मानित हुईं प्रधान पाठक शीला विश्वास, नवाचारों से बदल रहीं सरकारी स्कूल की तस्वीर
शिक्षक प्रतिभा अकादमी*छत्तीसगढ़ ने बिलासपुर में किया सम्मानित; खेल-खेल में शिक्षा और नवाचारों से बच्चों का भविष्य संवारने में जुटीं
सरायपाली (महासमुंद) शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, समर्पण और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने वाली शासकीय प्राथमिक शाला मुधा की प्रधान पाठक श्रीमती शीला विश्वास को शिक्षक प्रतिभा अकादमी, छत्तीसगढ़ द्वारा शिक्षक प्रतिभा सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया।
31 अक्टूबर को बिलासपुर में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू की उपस्थिति में उन्हें स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके शैक्षणिक नवाचारों, रचनात्मक शिक्षण पद्धति और ग्रामीण अंचल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों की पहचान है।
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से बदलाव की प्रेरक कहानी
विकासखंड सरायपाली, जिला महासमुंद के संकुल जम्हारी अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला मुधा में विगत तीन वर्षों से पदस्थ प्रधान पाठक श्रीमती शीला विश्वास ने विद्यालय की शैक्षणिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। जब उन्होंने विद्यालय में कार्य करना प्रारंभ किया, तब बच्चों का शैक्षणिक स्तर काफी चुनौतीपूर्ण था। बच्चों में पढ़ाई के प्रति झिझक, संकोच और आत्मविश्वास की कमी दिखाई देती थी। उन्होंने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए बच्चों की रुचि और क्षमता के अनुरूप शिक्षण की नई-नई गतिविधियां प्रारंभ कीं।
खेल-खेल में शिक्षा और गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर
श्रीमती विश्वास ने कक्षा शिक्षण को केवल किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रखा, बल्कि खेल-खेल में शिक्षा, कहानी-कथन, समूह अधिगम, सहपाठी अधिगम, विषय मित्र, गणितीय खेल, भाषा संबंधी गतिविधियां और शिक्षण सहायक सामग्री (TLM) का प्रभावी उपयोग शुरू किया। बच्चों को स्वयं करके सीखने और अपनी समझ को दूसरों के साथ साझा करने के अवसर दिए गए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, निपुण भारत मिशन एवं बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए बच्चों के भाषा और गणितीय कौशल को विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। 'जादुई पिटारा' जैसी खेल आधारित शिक्षण सामग्री, वर्ण एवं शब्द कार्ड, चित्र कार्ड, संख्या कार्ड और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सरल एवं रोचक तरीके से सिखाया जा रहा है।
'स्वयं सीखो' की अवधारणा से बच्चों में बढ़ा आत्मविश्वास
उनकी शिक्षण पद्धति की विशेषता है कि वे बच्चों को केवल सिखाने के बजाय स्वयं सीखने के लिए प्रेरित करती हैं। कक्षा में विषय मित्र, गली मित्र और सहपाठी अधिगम जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चे एक-दूसरे को सिखाते हैं। इससे बच्चों में नेतृत्व क्षमता, सहयोग की भावना, संवाद कौशल और आत्मविश्वास विकसित हो रहा है।
'सेल्फी विद सक्सेस' गतिविधि के माध्यम से बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। 'आज मैंने क्या सीखा' जैसी गतिविधि से बच्चे अपने सीखने की प्रक्रिया पर विचार करते हैं और अपनी उपलब्धियों को अभिव्यक्त करना सीखते हैं। पुस्तकालय, दीवार पत्रिका, चित्र आधारित गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशीलता एवं अभिव्यक्ति क्षमता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
बच्चों की उपलब्धियां बनीं नवाचारों की सफलता का प्रमाण
इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बच्चों के सीखने के स्तर में दिखाई देने लगा है। कक्षा पहली के पांच बच्चों को पढ़ना सिखाने की चुनौती के अंतर्गत दो माह के प्रयास से चार बच्चे स्वतंत्र रूप से पढ़ने लगे हैं, जबकि एक बच्चा निरंतर अभ्यास कर रहा है। इसी प्रकार कक्षा तीसरी के आठ बच्चों में से छह बच्चों ने अंग्रेजी पढ़ने में दक्षता प्राप्त की है। ये उपलब्धियां बच्चों के निरंतर अभ्यास, गतिविधि आधारित शिक्षण और व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम हैं।
बच्चे अब कक्षा में केवल निष्क्रिय श्रोता नहीं हैं, बल्कि गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करते हैं, प्रश्न पूछते हैं, उत्तर देते हैं और अपने सहपाठियों को भी सिखाते हैं। विद्यालय में सीखने का वातावरण भयमुक्त, आनंदमय और सहभागितापूर्ण बनाने का प्रयास लगातार जारी है।
शिक्षा के साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय जागरूकता
श्रीमती विश्वास का मानना है कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र है। इसलिए शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता, सामाजिक जागरूकता और बाल सहभागिता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। विभिन्न दिवसों और विशेष अवसरों पर बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जाता है।
विद्यालय में शाला प्रबंधन समिति, अभिभावकों एवं समुदाय की सहभागिता को भी विशेष महत्व दिया जाता है। पालकों को बच्चों की शैक्षणिक प्रगति से जोड़ने, उनकी उपलब्धियों को साझा करने और विद्यालय विकास में सहयोग लेने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
बच्चों की मुस्कान और उनकी सफलता ही सबसे बड़ा पुरस्कार
श्रीमती शीला विश्वास का मानना है कि प्रत्येक बच्चा प्रतिभावान होता है, आवश्यकता केवल उसकी प्रतिभा को पहचानने और उसे उचित अवसर देने की है। एक शिक्षक की वास्तविक सफलता तब है, जब बच्चा बिना किसी भय के सीख सके, अपनी बात कह सके और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके।
उनका लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण, आनंदमय एवं नवाचारी शिक्षा के समान अवसर मिलें। वे शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि बच्चों के लिए आनंद और खोज का माध्यम बनाना चाहती हैं। उनके प्रयास यह संदेश देते हैं कि सीमित संसाधनों में भी समर्पण, सकारात्मक सोच और नवाचार के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की तस्वीर बदली जा सकती है।