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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, 8 अधिकारियों की उड़नदस्ता टीम गठित, अवैध धान मिलने पर होगी जब्ती

एमसीबी : छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रशासन ने अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्ती की तैयारी कर ली है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान की अवैध खरीद-बिक्री, परिवहन, भंडारण और बिचौलियों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए जिला स्तरीय जांच समिति के साथ विशेष उड़नदस्ता दल बनाया गया है।कलेक्टर संतन देवी जांगड़े के निर्देश पर गठित इस टीम में आठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि धान खरीदी में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अवैध रूप से लाए गए धान के साथ उसके परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को भी जब्त किया जा सकता है।

धान खरीदी केंद्रों पर रहेगी विशेष निगरानी

जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और इसका वास्तविक लाभ पंजीकृत किसानों तक पहुंचाना है। इसके लिए जिले के सभी उपार्जन केंद्रों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।जांच दल को अवैध धान की आवक, भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़ी शिकायतों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की ओर से मिलने वाले अलर्ट पर भी तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

आठ अधिकारियों को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी

जिला स्तरीय जांच समिति और उड़नदस्ता दल में अलग-अलग विभागों के आठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • अपर कलेक्टर लिंगराज सिदार

  • डिप्टी कलेक्टर स्वप्निल वर्मा

  • जिला खाद्य अधिकारी विष्णु नारायण शुक्ला

  • जिला विपणन अधिकारी विनिता चौरासे

  • जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित मनेंद्रगढ़ के नोडल अधिकारी राजेश मिश्रा

  • कृषि उपज मंडी के मंडी सचिव राहुल कुमार साहू

  • वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक जोवाकिम मिज

  • ई-जिला प्रबंधक नारायण केवट

इन अधिकारियों को धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण करने, शिकायतों की जांच करने और अनियमितताओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने का दायित्व दिया गया है।

दूसरे राज्यों से आने वाले धान पर प्रशासन की पैनी नजर

समर्थन मूल्य पर खरीदी के दौरान दूसरे राज्यों से अवैध रूप से धान लाकर बेचने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।जांच टीम जिले में धान के परिवहन, भंडारण और बिक्री से संबंधित गतिविधियों की नियमित पड़ताल करेगी। यदि कहीं अवैध तरीके से धान लाने या बेचने का मामला सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि दूसरे राज्यों से लाया गया धान सरकारी खरीदी केंद्रों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर न बेचा जा सके।

कोचियों और बिचौलियों की तैयार होगी सूची

धान खरीदी में गड़बड़ी रोकने के लिए मंडी अधिकारियों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय कोचियों तथा बिचौलियों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।ऐसे लोगों की जानकारी एकत्र कर जिला कार्यालय को सौंपनी होगी। इससे प्रशासन को उनकी गतिविधियों पर नजर रखने और अवैध खरीद-बिक्री की संभावनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

दूसरे किसान के पंजीयन पर धान बेचने की कोशिश पडे़गी भारी

प्रशासन ने उन लोगों पर भी विशेष निगरानी रखने को कहा है, जो बिचौलियों से खरीदे गए धान को किसी दूसरे पंजीकृत किसान के नाम पर सरकारी खरीदी केंद्रों में खपाने का प्रयास करते हैं।यदि जांच में किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे किसान के पंजीयन का दुरुपयोग कर अवैध धान बेचने की कोशिश सामने आती है, तो धान और संबंधित वाहन जब्त किए जा सकते हैं। दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।

हर सप्ताह प्रशासन को देनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट

जांच दल को केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसकी जवाबदेही भी तय की गई है। अधिकारियों को प्रत्येक सप्ताह जांच और कार्रवाई से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।इससे उपार्जन केंद्रों की स्थिति, मिली शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई की नियमित समीक्षा की जा सकेगी। अपर कलेक्टर लिंगराज सिदार की ओर से जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

वास्तविक किसानों के हितों की सुरक्षा पर जोर

एमसीबी जिला प्रशासन ने धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया है। अवैध परिवहन, धान की रिसाइक्लिंग, बिचौलियों की सक्रियता और किसान पंजीयन के दुरुपयोग को रोकने के लिए आठ अधिकारियों की टीम मैदान में रहेगी।प्रशासन की इस पहल से धान खरीदी के दौरान होने वाली संभावित अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि सरकारी समर्थन मूल्य का लाभ केवल पात्र और वास्तविक किसानों को ही मिले।

 
 


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