शिक्षाविभाग के अधिकारियों की प्रताड़ना झेलने विवश शिक्षक  - CG Sandesh

शिक्षाविभाग के अधिकारियों की प्रताड़ना झेलने विवश शिक्षक

बलौदाबाजार जिले के कसडोल शिक्षा विकासखण्ड अन्तर्गत नागेड़ा संकुल के अंर्तगत ग्राम करमेल प्राथमिक शाला में पदस्थ धनेश्वर प्रसाद साहू का मामला प्रकाश में आने से हमारे सवांदाता ने शिक्षक से जानकारी लिया तो उसमें शिक्षाविभाग के अधिकारियों के कारनामें खुलकर सामने आये.

मामला इस प्रकार है कि उक्त शिक्षक विगत चार वर्षों से लकवाग्रस्त है, लकवाग्रस्त होने के कारण तबादला हेतु विभाग में आवेदन प्रतुत किया, और अपनी समस्या का लिखित रूप में दस्तावेज़ प्रस्तुत किया, किंतु विभागीय अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नही दिया. जिससे तबादला नही हो पाया.

ततपश्चात शिक्षक धनेश्वर प्रसाद ने विकासखण्ड शिक्षाआधिकारी को अपने गृहग्राम तेंदुभाठा, ग्राम पंचायत मटिया के अंतर्गत आने वाले किसी भी स्कूल में ब्यवस्था हेतु आवेदन प्रस्तुत किया,  जिसमे शिक्षाआधिकारी कसडोल ने आदेश दिया, किन्तु प्रधानपाठक प्राथमिक शाला करमेल जी पी साहू से रिलीब नही किया, जिससे अब तक धनेश्वर प्रसाद वही पदस्थ है.

कुछ समय बाद प्रधान पाठक जी पी साहू का ट्रांसफर आदेश आया, लेकिन लकवाग्रस्त जैसे जटिल समस्या से ग्रसित होने के बावजूद शिक्षक धनेश्वर प्रसाद का ट्रांसफर नही हुआ. क्यों नहीं हुआ इस बात की जानकारी तो केवल विभाग के पास हो सकता है. जबकि धनेश्वर प्रसाद ने प्रधान पाठक से पहले तबादला के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था.  

एक तरफ किसी भी प्रकार की समस्या नही होते हुए सामान्य शिक्षक का ट्रांसफर हो जाने से अब यह स्कूल एकल शिक्षिकीय हो जाएगा. लेकिन फिर भी विभाग ने ट्रांसफर आदेश जारी किया. इससे साफ जाहिर होता है, कि ब्यक्ति का पहचान, पहुँच, पैसा को देखकर ही सारे नियम लागू होता है.  

वहीं धनेश्वर प्रसाद का कहना है कि मैंने जब आवेदन लगाया तो इस स्कूल में 3 शिक्षक पदस्थ थे, फिर मेरा ट्रांसफर क्यो नही हुआ ? शिक्षक टी सी मालिक का नाम अतिशेष में आने के कारण अन्य जगह भेज दिया गया। और अब जब 2 शिक्षक है तो प्रधानपाठक का ट्रांसफर आदेश ? शिक्षक धनेश्वर प्रसाद साहू का कहना है कि मेरी हालत ऐसी की मैं अकेला कही नही जा सकता फिर भी स्कूल जाता हूं, मेरा निवेदन है कि मेरी हालत को समझकर मेरा ट्रांसफर किया जाय या तो मेरा ब्यवस्था किया जाय.

जबकि संकुल समन्वयक संग्रामसिंग पैकरा से जानकारी लिया तो बताया कि उक्त शिक्षक लकवाग्रस्त है कि जानकारी मैंने पूर्व विकासखण्ड शिक्षाआधिकारी कसडोल के के एन वर्मा को अवगत कराया था, किन्तु समस्या का निदान नही हुआ.

धनेश्वर प्रसाद ने कहा कि शिक्षा विभाग में पैसों के बलबूते शिक्षको के समस्या का निदान हो रहा है, मै अपनी बीमारी की वजह से अभी भी बिना सहारा के नही चल पाता. लेकिन क्या कहूं किसे कहूं मेरी बात कौन सुने.



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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