3 साल से घर पर रहकर ले रहा था वेतन ! किसी जिम्मेदार अधिकारीय... - CG Sandesh

3 साल से घर पर रहकर ले रहा था वेतन ! किसी जिम्मेदार अधिकारीयों ने नहीं ली जानकारी !

कसडोल विकासखण्ड के प्राथमिक शाला करमेल में शिक्षक धनेश्वर प्रसाद साहू के द्वारा एक ग्रामीण युवक को स्कूल में पदस्थ कर पढ़ाने का मामला प्रकाश में आया, हरिभूमि अखबार और प्रकाश यादव ने अपने समाचार माध्यम से प्रकाशित किया, जिससे कसडोल विकासखण्ड के शिक्षाआधिकारी का लापरवाही खुलकर सामने आया है, समाचार पत्र में लिखा गया कि, 3 वर्षो से लगातार शिक्षक सप्ताह में 2 या 3 दिन ही आता है,  और अपने स्थान पर ग्राम के एक युवक को नियुक्त कर रखा है ,जब प्राथमिक शाला में इस ढंग से शिक्षक के द्वारा कार्य कराया जा रहा है, तो क्या इसकी खबर विभाग के संकुल समन्यवक को जानकारी नही थी? यदि जानकारी थी तो क्या कसडोल शिक्षा अधिकारी को जानकारी दिया? यदि जानकारी दिया तो 3 साल तक कार्यवाही क्यो नही किये?  ये सारे सवाल आम जनता पालको पर उठ रहे है।

शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के द्वारा किस तरह से बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है, इधर छात्रो के भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए लाखों करोड़ों रुपयों शासन- प्रशासन खर्च कर रही है, और अधिकारी मस्त मौला बनकर शासन का राशि बिना कार्य किये कहा रहे है, यहां अखबार में प्रसारित समाचार में लिखा गया है कि 3 साल से घर पर रहकर वेतन ले रहा है, जबकि ये भी प्रसारित करना चाहिए कि 3 साल तक विभाग के अधिकारियों ने प्राथमिक शाला करमेल का किसी जिम्मेदार अधिकारी ने जानकारी नही ली. रही बात वेतन ले रहा है, तो संकुल समन्यवक के माध्यम से वेतन पत्रक शिक्षाआधिकारी कार्यालय को भेज जाता है, जिसमे शासन ने नियम बनाये है, की ग्रामपंचायत के सरपंच के द्वारा सील और साइन कर सट्रीफाइट किया जाता है कि संकुलसमन्वयक के द्वारा जारी किया वेतन बिल में उपस्थिति सही है, तो क्या समन्यवक ने गलत जानकारी कसडोल कार्यालय को दिया ?

यदि संकुलसंमन्वयक ने अनुपस्थित की जानकारी दी तो वेतन किस आधार पर दिया गया, ये सब बातें पालको के समझ से परे है, जिससे एक बात तो साफ नजर आती है, शिक्षा विभाग में अधिकारियों का लापरवाही जाहिर होता है, ग्रामीणों का कहना है इस प्रकरण में कार्यवाही के लिए शिक्षामंत्री और मुख्यमंत्री तक बात रखेंगे, जिससे लापरवाह विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यवाही हो और हमारे बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही हो.


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