2006 से आज तक शिक्षक के इंतजार में बेलारी(ज)का मिडिल स्कूल। - CG Sandesh

2006 से आज तक शिक्षक के इंतजार में बेलारी(ज)का मिडिल स्कूल।

कसडोल शिक्षा विकासखण्ड के बेलारी(ज) मिडिल स्कूल का मामला प्रकाश में आया।जब अचानक कसडोल विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के0के0 गुप्ता ने बेलारी (ज) स्कूल का अचानक निरीक्षण करने पहुचे तो देखा कि स्कूल में ताला लगा है, स्कूल के शिक्षक को नोटिस दिया गया और स्पष्टीकरण देने हेतु कसडोल शिक्षा कार्यालय बुलाया गया।

मामला यह कि 31 अक्टूबर को स्कूल बंद क्यो था। स्कूल के शिक्षिका ने स्पष्टीकरण लेकर कार्यालय पहुचकर जानकारी दिया तो अधिकारी सन्न रह गए। शिक्षिका ने बताया कि वर्ष 2006 से आज तक एकलशिक्षिय होने का दंश झेल रही हु। जब आपके द्वारा निरीक्षण करने पहुचे तो में मध्यान्ह भोजन संबंधित जानकारी संकुलसमन्वक के द्वारा मांगी गई जानकारी देने संकुल केंद्र नागेड़ा गयी थी । चुकी मै अकेली शिक्षक हु और बिल को जमा करना भी जरूरी था, इस कारण इतने विद्यार्थियों को किसके भरोसे छोड़ती कौन जवाबदारी लेगा इस कारण स्कूल कि छुट्टी कराकर गयी थी।

मामले की जानकारी हमारे संवाददाता को होने पर तहकीकात किया गया तो पूरी जानकारी में विभाग के कार्य पर सवालिया निशान लगना स्वाभविक था। वर्ष 2006 से सर्व शिक्षा अभियान के चलते भी इस स्कूल को अनदेखी करते गए, शिक्षा अभियान जोरो पर था, शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए विशेष तौर से अभियान चलाया गया था,जिसमे बच्चो की शिक्षा स्तर को सुव्यवस्थित करने हेतु लाखो करोड़ो रूपये शासन इस विभाग को दिए,किन्तु विभाग एक शिक्षक नही दे पाया,विडंबना देखिए क्यो इस स्कूल के साथ और बच्चों के भविष्य के साथ के खिलवाड़ किया गया।

2006 से आज तक इन 13 सालो में कितने अधिकारी आये और गए, कितने शिक्षको का तबादला भी हुआ,कितनी ब्यवस्था भी किये गए,कसडोल से अतिसेस बताकर अन्य विकासखण्ड में भेज दिया गया ,प्रधानपाठकों की भर्ती भी 2010 में की गई तत्कालीन जिलाशिक्षा अधिकारी जी0 आर0 चंद्राकर लंबे समय तक जिले में रहे, 2010 प्रधान पाठको की भर्ती में विशेष योगदान जिलाशिक्षाधिकारी को जाता है,फिर भी एकल शिक्षकीय स्कूल की दसा नही सुधार पाए ।

इस विकासखण्ड मे शिक्षको की कमी के बावजूद अतिसेस शिक्षक बताकर अन्य विकासखण्ड में भेजना सिर्फ रुपया कमाने का योजना तैयार किया गया, वैसे ही प्रधानपाठकों को मूल शाला में रकम लेकर तबादला किया जाना,क्या अधिकारियों का विद्यार्थियों के प्रति ध्यान देना दिखता है। क्या इन अधिकारियों को कोई नेता या मंत्री ये जानकारी लेकर की 2006 से आज तक एक शिक्षक की ब्यवस्था नही कर पाए,बेलारी(ज) में और ऐसे कई स्कूल है कसडोल में जहा इस तरह की समस्या है।विभागीय जिम्मेदार अधिकारी पर कार्यवाही क्यो नही होती,और यही अधिकारी कोई शिक्षक के एक दिन स्कूल नही जाने पर कार्यवाही नोटिस जारी करते है।

कुछ दिन पहले नागेड़ा संकुल के करमेल के एक लकवाग्रस्त शिक्षक का मामला प्रकाश में आया इस पर भी कसडोल शिक्षाआधिकारी ने उक्त शिक्षक को बुलाया और जानकारी ली,यदि शिक्षक की गलती तो तुरन्त कार्यवाही और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाए जा रहे है तो कारवाही कौन करेगा।इस क्षेत्र के कई नेता जिला में जनपद में जिम्मेदार पद पर आसीन होते हुए भी शिक्षा का हाल चौपट हो रहा है,शिक्षक से विधायक बने माननीय चंद्रदेव राय का इस बेलारी(ज)से होकर आये दिन गुजरते रहते है,पाँच साल सनम जांगड़े,पांच साल शिव कुमार डहरिया,अब राय जी की बारी । देखना है कि एकल शिक्षिकीय से कब पायेगा छुटकारा.


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