कसडोल विकासखण्ड में शिक्षा का गिरते स्तर पर हरिशंकर जायसवाल ... - CG Sandesh

कसडोल विकासखण्ड में शिक्षा का गिरते स्तर पर हरिशंकर जायसवाल ने विभाग के अधिकारियों को जमकर कोसा.

शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष बलौदाबाजार के हरिशंकर जायसवाल ने कसडोल विकासखण्ड में शिक्षा का गिरते स्तर पर शिक्षा अधिकारीयो को जमकर कोसा और कहा कि सारी जिम्मेदारी इस विभाग के अधिकारियों की है.

हरिशंकर जायसवाल ने हमारे संवाददाता को बताया कि कसडोल में जो भी शिक्षा संबंधित समस्या है, जिसमे कई स्कूल एकलशिक्षकीय,  कई स्कूल में बच्चों की दर्ज संख्या का कम होने पर भी शिक्षक की संख्या ज्यादा, प्रशासनिक आदेश का जिसमे ट्रांसफर होने के बाद भी आदेश का पालन नही करते हुए स्कूल में डटे रहना, ब्यवस्था किये गए शिक्षको को मूल शाला में वापस न जाना, शिक्षको का मनमानी ये सब का कारण एक ही है कि यहां पदस्थ पूर्व के जिम्मेदार अधिकारी, जिन्होंने सिर्फ कार्यालय में बैठकर कुछ ओहदेदार नेताओ के दवाब आकर कसडोल विकासखण्ड में शिक्षा का स्तर गिरा दिया।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन विकासखण्ड शिक्षाआधिकारी ए0आर0 धृतलहरे के कार्यकाल में कसडोल विकासखण्ड के 151 शिक्षको को अतिशेष बताकर अन्य विकासखण्ड में भेजने से यहाँ की शिक्षा ब्यवस्था चरमरा गई है. इनकी लापरवाहीपूर्वक अतिशेष बताना और जिस विकासखण्ड में भेजा गया जहाँ पर पहले से अतिशेष शिक्षक है। यहाँ अतिशेष बताना तत्पश्चात स्कूलों में एकलशिक्षकीय होना समझ से परे है.  जिलाशिक्षाधिकारी जे0आर0 चंद्राकर की भूमिका इस कसडोल में गिरते स्तर के लिए पूर्ण जवाबदेही कहना गलत नही होगा।पूर्व से ही इस विकाशखण्ड मे शिक्षकों की कमी उसके बाद शिक्षको को अन्य विकासखण्ड में भेजना।

उन्होंने कहा कि यह ट्रांसफर प्रकिया से साफ जाहिर होता है कि ज़िम्मेदार अधिकारियों को शिक्षा का स्तर गिरे या बढ़े कोई लेना -देना नही।इसके बाद प्रधानपाठकों का मामला चला जिन प्रधानपाठकों को अपने गृह ग्राम के आसपास जाने हेतु आदेश निकलवाने में तत्कालीन जिलाशिक्षाधिकारी जे0 आर0 चंद्राकर का काफी योगदान को नकारा नही जा सकता। उस समय कसडोल विकासखण्ड के शिक्षाआधिकारी के0एन0 वर्मा थे। इन्होंने ने भी आँख बंद कर इस आदेश का पालन किया, जिस स्कूल से प्रधानपाठकों को रिलीव किया गया, उस स्कूल में इनके जाने के बाद आज तक वे स्कूल एकलशिक्षकीय का दंश झेल रहे है, यदि तत्कालीन शिक्षाआधिकारी कसडोल ने यह स्कूल एकलशिक्षकीय होने पर बच्चो का शिक्षा पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, बच्चो की भविष्य की चिंता होती और निर्देश का पालन किया होता जैसा कि यदि एकलशिक्षकीय स्थिति पर रिलीब करने का नियम नही है। पालन किया होता तो आज यह स्थिति नही होती।

विकासखण्ड में पदस्थ संकुलसमन्वयको को शैक्षणिक कार्य हेतु नियुक्त किया गया है, किन्तु किसी भी संकुलसमन्वयक स्कूल में अध्यापन कार्य नही करते,बल्कि ये काम जब किसी प्रकार का आदेश स्रोत समन्वयक द्वारा जारी किया जाता है तो ये संकुल पहुँचकर वाट्सअप के माध्यम से सूचना देकर कार्य का इतिश्री कर देते है।जबकि संकुल का काम समाप्त होने के बाद इनको यदि स्कूल समय है जहाँ शिक्षक की समस्या है वहाँ अध्यापन किये जाने से बच्चो की शिक्षा संबंधित समस्या को कुछ हद कर दूर किया जा सकता है। लेकिन इनके अधीनस्थ अधिकारीओ का सिर पर हाथ होने के कारण अध्यापन कार्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है, स्कूल समय मे कई संकुलसमन्वयक चौक चौराहों पर गप्पे मारते नजर आते है।

कसडोल से माननीय गौरीशंकर अग्रवाल विधानसभा अध्यक्ष के रहते हुए भी विकराल समस्या पर ध्यान नही दिया गया।हरिशंकर जायसवाल ने बताया कि हम शिक्षक संघ कई बार समस्या को लेकर गए,किन्तु समस्या ज्यो की त्यों बरकरार है ।हमारे शिक्षक संघ से विधायक बने माननीय चंद्रदेव राय को चुना गया।ताकि इस क्षेत्र में शिक्षा का स्तर अच्छा हो और समस्या का निराकरण हो,किन्तु अभी तक कोई पहल देखने को नही मिला।

इन सात आठ सालों में शिक्षा संबंधित समस्या आई बच्चो का भविष्य अन्धकारमय हुआ, इसके लिए हम बलौदाबाजार जिले से समस्त शिक्षक एकजुट होकर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही हो कहकर शिक्षामंत्री,एवम माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास जाकर अवगत कराया जाएगा।जिससे भविष्य में इस तरह से अधिकारियों के द्वारा विद्यार्थियों के भविष्य के खिलवाड़ न कर सके।

कसडोल विकाशखण्ड शिक्षाआधिकारी के0के0गुप्ता ने जिला अध्यक्ष जायसवाल को इस विकट समस्या के समाधान हेतु आपात बैठक रखने की बात कही है,जिससे समस्या से निपटा जा सके।जिससे शिक्षक संघ ने इस बैठक हेतु अपनी सहमति दी है।


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