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बलौदाबाजार:- शिक्षण सत्र मात्रा कुछ ही महीने शेष, स्कूल में शिक्षको की कमी, केवल मध्यान्ह भोजन के लिए आते है बच्चे।

जिले के कई विकासखंड में एकल शिक्षकीय के भरोसे बच्चो का भविष्य बनाने के राग अलापने वाले अधिकारियों की मंशा क्या है, ये तो वही जाने, किन्तु एक बात तो पालको और ग्रामीणों जान गए है कि सिर्फ अधिकारियों को शहरी क्षेत्रों में संचालित हो रहे स्कूलों को ध्यान देना है। ग्रामीणों में संचालित हो रहे स्कूलों में कोई नेता या विभाग के बड़े अधिकारियों को इतनी फुर्सत कहा कि जिससे उनको जानकारी होवे।

आज ग्रामीण क्षेत्रो के स्कूल की समस्या पहले से दिनो दिन खराब होती जा रही है, अब तो शिकायत करना भी छोड़ दिये है, क्योकि शिकायत या समस्या पर कोई पहल करने वाला नही है, अभी नगरी निकाय चुनाव का हवाला दिए कि हम अभी ब्यस्त है, चुनाव के बाद इन ओर ध्यान दिया जाएगा।

तो बता दे अब पंचायत चुनाव आने वाला है, या अधिकारी ये ही बात पुनः दोहराएंगे की अब पंचायत चुनाव खत्म हो जाने दो स्कूलों की समस्या का निवारण कर देंगे, तो क्या इसके बाद परीक्षा की बात आएगी। कहने का मतलब है ग्रामीण स्तर में संचालित हो रहे स्कूल मात्र मध्यान्ह भोजन के सहारे चल रहा है, शिक्षको का कहना है कि यदि मध्यान्ह भोजन बद हो जाय तो स्कूल बंद करना पड़ेगा, क्योकि एक ही मात्र सहारा है बच्चो की उपस्थिति का की भोजन के बहाने स्कूल आ रहे है, हम शिक्षक तो विभागीय प्रशिक्षण और ऑफिस कार्य मे ब्यस्त हो जाते है ऊपर से अकेले शिक्षक क्या करे किसे कहे, कौन सुनेगा हमारी बात। इसलिए जाते है स्कूल ड्यूटी है करते है, गुणवत्ता आये न आये हमे तो समय मिलता ही नही बाकी राम राम जाने।


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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