बारनायपारा अभ्यारण्य में पदस्थ वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी भू माफिया पर कार्यवाही करने से घबरा रहे है !
अभी हाल में हुई घटना चीतल प्रकरण में वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा आरोपियों को पकड़ने में सफलता पाई जिसके बाद सारे आरोपी को जेल भेज दिया गया । अब मामला रंगे हाथ पकडने के कारण कार्यवाही हुई है ऐसा कहा जा रहा है । कहा जा रहा है कि यदि आरोपी रंगे हाथ नही पकड़े जाते तो ये अधिकारी मामला को सुलझाने का प्रयास ही नही करते ।
बार अभ्यारण्य में पूर्व पदस्थ रौतिया रेंजर ने जंगल मे अवेध कटाई के मामले में एक ब्यक्ति पर रोक लगाने की कोशिक की तो विभाग के अधिकारियों के बताये अनुसार रेंजर के खिलाफ पूरा जंगल क्षेत्र में बसे गांव के ब्यक्तियो ने बया चौकी में रिपोर्ट दर्ज कर कार्यवाही हेतु करीबन माह भर तक आंदोलन किया और अंत मे रेजर को बार से हटना पड़ा।
अभी चीतल प्रकरण में बार मे कुछ संदेही ब्यक्तियो को पूछताछ के लिए बुलाये जाने पर बार जंगल मे बसे कुछ ग्राम के ग्रामीणों ने बार वन विभाग के ऑफिस को घेराव किया गया। जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने पुलिस थाना राजदेवरी को सूचना कर दल बल सुरक्षा के लिए बुलाया गया। कहने का मतलब यह है । विभाग के अधिकारियों को अब डर हो गया है।
चीतल प्रकरण में आरोपियों को पकड़ने में विभाग के डिप्टी रेंजर सालिकराम डड़सेना मुख्य भूमिका रही है, लेकिन अभी कुछ दिनों पहले ग्राम चरोदा में वन विभाग बेरियर के पास गाली गलौच और हाथापाई की शिकायत बया चौकी में दर्ज किया गया। इस बात से जाहिर होता है कि विभाग के कर्मचारी अब कार्यवाही करने में चुस्ती नही दिखा पा रहे है।
ग्राम ढेबी मे एक ब्यक्ति द्वारा सेंचुरी जमीन पर 30 एकड़ के आसपास जंगल जमीन को काटकर खेत बनाया गया और विभाग के द्वारा सिर्फ लकड़ी प्रकरण पर ही कार्यवाही किया गया । लेकिन सेंचुरी जमीन पर लगे पेड़ पर कार्यवाही करने के बाद शांत है। तो जमीन पर कार्यवाही क्यो नही किया जा रहा है। इससे साफ जाहिर होता है, या तो विभाग का मिलीभगत है, या विभाग कार्यवाही से घबरा रही है।
यदि ऐसे भूमाफिया पर कार्यवाही नही किया गया तो आने वाले समय मे सेंचुरी जंगल का नामोनिशान मिट सकता है। कार्यवाही नही करने से भूमाफिया के हौसले बुलंद है। और वन विभाग के अधिकारियों के हौसले पस्त नजर आ रहे है।