मौसम बिगड़ने के कारण नहीं हो पाया में उपार्जन केंद्र से उठाव, धान का हुआ अंकुरण
पिछले एक सप्ताह से मौसम बिगड़ने का असर खरीदी केंद्रों में रखी धान को देखकर लगाया जा सकता है. बेमौसम बारिश के होने से कई हजार बोर धान के नुकसान होने का अनुमान है. इसी तरह लगभग हर वर्ष बेमौसम बारिश होने की वजह से कई बोर धान किसानों की मेहनत बर्बाद हो जाती है. लेकिन फिर भी हर वर्ष धान को ऐसे खुले में रखकर उसे बर्बाद करने का न्योता दिया जाता है.
महासमुंद जिले में किसनों की धान बेचने के लिए अधिक दुरी तय ना करना पड़े इसलिए इस वर्ष 81 समितियों में उपार्जन केंद्रों की संख्या 127 कर दी गई, लेकिन जो उपार्जन केंद्र पहले से वहां से उठाव अथवा धान को सुरक्षित रखने के लिए कोई बेहतर कदम नहीं उठाया गया. जबकि इस उपार्जन केंद्रों में करोड़ो का धान एकत्रित किया जाता है.
मामला ग्रामीण सेवा सहकारी समिति रसोड़ा के
उपार्जन केन्द्र धुमाभांटा का है जहाँ वर्त्तमान में लगभग 26 हजार 6 सौ किन्टल धान
है, कुल ख़रीदे गए धान की कीमत लगभग 7 करोड़ रुपये है. जिसमे आधे से अधिक धान के बोरों
में धान अनुकुरित हो आये है, लेकिन उठाव नहीं हो पाया. उपार्जन केन्द्र की
अव्यवस्था ऐसी थी की कई धान के बोर खुले थे, कुछ फट गए थे जिन्हें बहार से मवेशी भी
आकर खाने लगे थे. जबकि नीचे रखे धान से दुर्गन्ध भी आने लगी थी. जिन्हें देखकर
अनुमान लगाया जा सकता है कि धान बर्बाद हो जायेगा, और किसी तरह से सरकार को इसका
खामियाजा भुगतना पड़ेगा.