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हर गर्भवती माता की सिकलिंग जांच करने चलेगा अभियान, बलौदाबाजार सहित राज्य के तीन जिलों का चयन

बलौदाबाजार,12 मार्च 2020/जिले की हर गर्भवती महिला एवं उसके पति का निःशुल्क सिकल सेल जांच किया जायेगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत घर-घर पहुंचकर मौके पर ही उनका परीक्षण किया जायेगा। छत्तीसगढ़ राज्य के 28 जिलों में से बलौदाबाजार सहित दुर्ग एवं रायपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस काम को लिया गया है। सिकल सेल सुरक्षा अभियान के नाम से संचालित कार्यक्रम के अंतर्गत अधिकारियों-कर्मचारियों के संवेदीकरण को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित की गई। जिला कलेक्टर श्री कार्तिकेया गोयल एवं राज्य स्तरीय सिकल सेल प्रकोष्ठ के उप संचालक डाॅ. एस.के.बिंझवार ने सिकल सेल के संबंध में लोगों से अपेक्षित सावधानियां एवं इलाज के संबंध में विस्तार से समझाया।

कलेक्टर श्री कार्तिकेया गोयल ने कहा कि सिकल सेल बीमारी पुरखों से आती है। यह लोगों में हवा-पानी से फैलने वाला रोग नहीं है। इस रोग से शरीर में कम खून बनता है। कुछ भी खायें, शरीर पर लगता नहीं है। अभी तक की स्थिति में इसका संपूर्ण उपचार तो नहीं आया है, लेकिन सुपोषण अभियान के सुचारू संचालन से इसके कुप्रभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिकलिंग बीमारी के राष्ट्रीय औसत से छत्तीसगढ़ में इसके ज्यादा मरीज हैं। वैज्ञानिक तरीके से इसकी जांच कराकर जीवन में सावधानी बरतने से इसका कष्ट कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के 28 जिलों में से बलौदाबाजार का संपूर्ण जांच के लिए चयनित किया जाना बड़े सौभाग्य की बात है। इस अवसर को हमें गंभीरता से लेकर पूरा किया जाना है। इस अभियान की तिथि की जानकारी अलग से दी जायेगी। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना वाइरस के संबंध में लोगों में जागरूकता फैलाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वच्छता इस बीमारी से बचने का बड़ा उपाय है।

राजधानी रायपुर से आये उप संचालक डाॅ. बिंझवार ने कहा कि बलौदाबाजार जिले में लगभग 60 हजार लोगों के सिकल सेल जांच का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। इनमें गर्भवती महिला, उनके पति एवं पाॅजीटिव्ह प्रकरण आये तो उनके बच्चे की जांच भी शामिल हैं। साल्युबिलिटी टेस्ट के जरिये तत्काल इसका परिणाम आ जायेगा। इसके परिणाम को गोपनीय रखा जायेगा। गर्भवती महिला की जांच रिपोर्ट पाॅजीटिव्ह आ जाये तो इसे हाई रिस्क मानते हुये उनके प्रसव एवं बाद की संपूर्ण निगरानी स्वास्थ्य अमले द्वारा की जायेगी। सीएमएचओ डाॅ. खेमराज सोनवानी ने बताया कि संपूर्ण जनसंख्या के अमूमन 10 फीसदी लोगों में सिकल सेल की संभावना रहती है। इन 10 फीसदी में 9 प्रतिशत कैरियर एवं केवल 1प्रतिशत मरीज होते हैं। कैरियर लोगों को काउंसिलिंग एवं भावी जीवन में रखने वाली सावधानियां भी बताई जायेगी। मरीज पाये जाने पर उनका इलाज सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क किया जायेगा। नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ राजेश अवस्थी ने आभार प्रकट किया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डाॅ.ए.एस.परिहार, अभियान के जिला स्तरीय नोडल अधिकारी डाॅ. ए.के.वर्मा, डाॅ. राकेश प्रेमी, डीपीएम सृष्टि मिश्रा सहित सभी विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।


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