रक्षक ही भक्षक बन जाएँ तो कैसे बचेगा जंगल
बारनवापारा:- वनविभाग के कर्मचारियों का भ्रष्टाचार का खुलमखुल्ला खेल खेला जा रहा है, विभागीय अधिकारी बिना किसी के परवाह किये सड़क निर्माण कार्य में गुणवत्ता विहिन कार्य कर रहें है. जिसका अखबार में प्रमुखता से प्रकाशन किये जाने के बावजूद विभाग के अधिकारी इस भ्रष्टाचार पर कार्यवाही नहीं कर रहे है.
मामला बारनवापारा में चरौदा से देवगांव के बीच किये जा रहे सडक निर्माण कार्य का है. यह मार्ग ग्रामीणो का आवागमन में सुविधा हो कहकर विभाग के द्वारा निर्माण कराया जा रहा है. यह मार्ग बोल्डर, मिटटी, मुरूम से बनाया जाना है. जिसका वन विभाग द्वारा बोल्डर मुरूम का एवं मिटटी का ठेका दिया गया है.
निर्माण कार्य विभाग के द्वारा किया जा रहा है, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों के सह में अभ्यारण्य से दोहन कर मुरूम निकाला गया. जिसकी शिकायत किया गया जिस पर बार रेंजर के कुणाल चंद्राकर ने तुरंत विभाग के वनरक्षक को मना करने की बात कहते हुए काम बंद करवाने की बात कही.
यहां यह बताना लाजमी होगा कि जब शिकायत किया गया तो सडक निर्माण के लिये पर्याप्त मा़त्रा में मुरूम का उपयोग किया जा चुका था. मुरूम कों बकायदा जे0सी0बी0 मशीन का उपयोग किया गया और डम्फर से परिवहन किया गया. जो वन विभाग के कर्मचारियों के संज्ञान में हुआ. क्या वन विभाग के कर्मचारियों को सह नहीं मालुम की सेंचुरी क्षेत्र से किसी प्रकार का दोहन करना कानुनन जुर्म है.
बोल्डर की बात करे तों निर्माण में फर्शी पत्थर के टुकडों का उपयोग किया जा रहा है. जिसका विभाग के रेंजर और एस0डी0 ओं0 जानकारी भी है. जिससे साफ जाहिर होता है कि वन विभाग के अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार को बढावा दिया जा रहा है. विभाग के अधिकारी मौन साधें हुये है, इन्हें किसी प्रकार का डर नहीं है.
इनके कार्य करवाने के अंदाज से ऐसा महसुस हो रहा है कि विभाग के अधिकारियों का मिलिभगत कर कार्य किया कजा रहा है. इस तरह से कार्य से बरसात में एक दिन भी ग्रामीण नहीं चल पायेगें, क्योंकि जिस फर्शी पत्थर का उपयोग किया जा है वह बरसात का पानी पड़ने के बाद ऐसा हो जायेगा जिसमे दुपहिया वाहन यहां तक पैदल चलना भी मुश्किल हो जायेगा.
ग्रामीणों इसकी शिकायत विभाग के मंत्री से किये जाने की बात कह रहे है. क्योकि विभाग में शिकायत करना बेकार है, क्योकि काम विभाग के कर्मचारियों द्वारा करवाया जा रहा है.