बिना प्रामाणिक दस्तावेज के किसान की जमीन को कर दिया दूसरे के... - CG Sandesh

बिना प्रामाणिक दस्तावेज के किसान की जमीन को कर दिया दूसरे के नाम, तहसीलदार एवं उपपंजीयक के भूमिका पर उठ रहे सवाल.

कसडोल । पिछले चार पीढ़ी से काबिज एवं काश्त कारी करते आ रहे किसान की जमीन को तहसीलदार ने एक अन्य व्यक्ति के नाम पर दुरुस्तीकरण करा दिया और उक्त व्यक्ति ने बेशकीमती जमीन के कुछ हिस्से को दूसरे व्यक्ति के पास बेंच दिया.

इसकी जानकारी लगते ही किसान ने एस डी एम न्यायालय में अपील कर जमीन खरीदी बिक्री पर रोक लगवाया. एस डी एम द्वारा रोक लगाने के बाद भी जालसाज व्यक्ति ने तहसीलदार एवं उपपंजीयक से सांठगांठ कर जमीन के बचे हुए हिस्से को भी बेंच दिया और रजिस्ट्री भी करा लिया. जिसके बाद इस मामले में तहसीलदार एवं उपपंजीयक की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.

प्राप्त जानकारी के अनुसार कसडोल तहसील क्षेत्र के ग्राम कटगी निवासी महेश्वर पिता हरीराम देवांगन के नाम पर ग्राम कटगी स्थित खसरा नम्बर 1589/1 रकबा 0-182 हे0 भूमि पिछले चार पीढ़ी से काबिज़ होकर काश्तकारी करते आ रहे हैं. उक्त भूमि को ग्राम कटगी निवासी राजनारायण पिता श्यामलाल देवांगन ने बिना कोई कागजात के त्रुटिवश दूसरे के नाम पर होने का हवाला देते हुए अपने नाम पर दुरुस्त करने दिनांक 26-06-2019 को आवेदन पत्र प्रस्तुत किया.

जिस पर प्रकरण दर्ज कर तहसीलदार ने अनावेदक महेश्वर पिता हरीराम को आहूत किया तब अनावेदक ने उक्त भूमि पर अपना मालिकाना हक सम्बन्धित दस्तावेज पेश करते हुए आवेदक द्वारा प्रस्तुत दावा को गलत बताया. अनावेदक ने अपने कथन में बताया कि उसके परदादा बुधराम एवं राजनारायण के दादा पतिराम जो कि आपस में भाई-भाई थे और खसरा नम्बर 1588 पतिराम को आपसी बंटवारा में प्राप्त हुआ था तथा खसरा नम्बर 1589 बुधराम को मिला था और अपने अपने के हिस्से के भूमि पर काबिज थे.

लेकिन लिपकीय त्रुटिवश पटवारी अभिलेख में ख0 नं0 1588 बुधराम के एवं ख0 न0 1589 पतिराम के नाम पर दर्ज हो गया था जिसे उन्होंने रिकॉर्ड दुरुस्त करने तहसील न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था.

जिस पर तहसीलदार द्वारा नामांतरण क्रमांक 217/ अ / 10 आ / दि / 30 - 04 -1984 के द्वारा ख 0 नं 0 1588 को पतिराम के नाम पर तथा ख0 नं0 - 1589 को बुधराम के नाम पर दर्ज कर रिकॉर्ड दुरुस्त करने का आदेश पारित किया था तब से आदेशानुसार रिकॉर्ड दुरुस्त किया गया.

बाद में ख0 नं0 1588 को पतिराम के पुत्रों रामसहाय एश्यामलाल द्वारा 30- 05- 1984 को नाबालिक संतोष पिता पुरुषोत्तम अग्रवाल के पास बिक्री कर दिया है तथा ख नं 1589 में राजनारायण का कोई का कोई हक व कब्जा नहीं है.

अनावेदक महेश्वर पिता हरिराम के द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं साक्ष्य को दरकिनार करते हुए तहसीलदार द्वारा ग्राम पंचायत कटगी के उपसरपंच शिवकुमार थवाईत एवं कुछ पंचों द्वारा बिना पंचायत प्रस्ताव के दिए गए पंचनामा के आधार पर अपने आ / दि / 05 -10- 2019 के अनुसार ख0 नं 0 1589 को राजनारायण पिता श्याम लाल के नाम पर दुरुस्त करने का आदेश पारित कर दिया और आदेश पारित होने के मात्र 5 दिन के भीतर ही पटवारी ने नाम दुरुस्त कर राजनारायण को उक्त भूमि का नकल दे दिया और 10-10-2019 को राजनारायण ने ख0 नं0 1589 / 1को नक्शा बटांकन किए बिना ही उपपंजीयक ने उक्त भूमि में से 0ण्060 हे0 भूमि का रजिस्ट्री कर दिया.

इस बात का अन्य लोगों से जानकारी प्राप्त होते ही महेश्वर ने प्रकरण का नकल लेकर एस डी एम न्यायालय में अपील प्रस्तुत कर उक्त भूमि के खरीदी बिक्री और नामांतरण पर रोक लगाने की मांग की जिस पर एस डी एम द्वारा अपने आदेश क्र / 2379 / वा / अ वि अ / 2019 दिनांक 14 - 10- 2019 को उक्त भूमि के खरीदी बिक्री पर पूर्णतः रोक लगा दिया ए एस डी एम के द्वारा रोक लगाने के बाद पटवारी द्वारा नकल नहीं दिए जाने पर तहसीलदार द्वारा नकल एनक्शा प्रदान किया गया और रोक के बावजूद उपपंजीयक ने भूमि का 13 - 11-2019 को शेष बचे हुए हिस्से को बिना नक्शा बटांकन के ही फ़ोटोदेवी पति नारायण प्रसाद देवांगन कटगी तथा राधा बाई पति साधराम के नाम पर रजिस्ट्री कर दिया.

इस मामले में हैरतअंगेज बात ये है कि शशिकांत गढेवाल ने एस डी एम के द्वारा र्रोक लगाए जाने और हल्का पटवारी द्वारा नक्शा बटांकन किए बिना केवल तहसीलदार के हस्ताक्षर युक्त नकल के आधार पर रजिस्ट्री कैसे कर दिया.

इस सम्बंध में तहसीलदार एस एल सिन्हा से पूछने पर कहा कि मैंने नकल आवेदन पर सत्यापित नकल प्रदान किया है बिक्री नकल नहीं दिया है. उपपंजीयक शशिकांत गढेवाल से पूछे जाने पर जिला पंजीयक से जवाब लेने कहा गया , यह पूछे जाने पर गलती आपने किया है तो जवाब जिला पंजीयक कैसे देंगे तो उसने कोई जवाब नहीं दिया.


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